जड़ से सबको साफ़ किया
फिर कहते हैं माफ़ किया !
लाठी-गोली बच्चों को दी
कहते हैं इंसाफ़ किया।
‘डायर’ बनकर हमला बोला
कायर बनकर माफ़ किया।
जो भी सच की हाँक लगाता
उसको वतन-ख़िलाफ़ किया।
फ़स्ल ज़हर की पकी खड़ी है
काटो निकलो माफ़ किया !
जड़ से सबको साफ़ किया
फिर कहते हैं माफ़ किया !
लाठी-गोली बच्चों को दी
कहते हैं इंसाफ़ किया।
‘डायर’ बनकर हमला बोला
कायर बनकर माफ़ किया।
जो भी सच की हाँक लगाता
उसको वतन-ख़िलाफ़ किया।
फ़स्ल ज़हर की पकी खड़ी है
काटो निकलो माफ़ किया !
चुप्पी के भी अर्थ बड़े हैं
यूँ ही ताले नहीं जड़े हैं ।
संविधान को घोट रखा है
लोकतंत्र की राह अड़े हैं ।
बच्चों को पुचकारी देकर
डंडा-लाठी लिए खड़े हैं।
पेपर लीक तमाशा लगता
रोजगार ख़ुद लिए पड़े हैं ।
आँसू सूख चुके हैं उनके
अब तो केवल काँट गड़े हैं।
दुनिया उलट-पुलट हो जाए
कुर्सी और ज़ुबाँ जकड़े हैं ।
मौन तभी टूटेगा अब तो
राम कहें ‘प्रभु आप बड़े हैं’।
-संतोष त्रिवेदी