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26 सितंबर 2012
रचना जब विध्वंसक हो !
जब चुप्पी इतनी क़ातिल है,
लब खोलेंगे तब क्या होगा ?
जब छूछे नैन बरसते हैं,
भर आएँगे तब क्या होगा ?
अल-सुबह से छाई वीरानी,
शब आ जाने पर क्या होगा ?
बंजर धरती दहके हरदम,
बादल बरसेंगे,क्या होगा ?
रचना जब विध्वंसक हो,
साहित्य-सृजन तब क्या होगा ?
लिए आइना फिरते हरदम,
खुद झांकेंगे तब क्या होगा ?
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