हाथी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
हाथी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

23 अक्टूबर 2012

चींटी और हाथी !

हाथी चींटी से कहे,तू ना समझे मोहि
मेरे पांवों के तले,मौत मिलेगी तोहि

चींटी बोली नम्र हो,मद से मस्त न होय
वंशहीन रावण हुआ,कंस न पाया रोय

मरने से बेख़ौफ़ हूँ ,चलती अपनी चाल
हर पल जीती ज़िन्दगी,नहीं बजाती गाल ।।

छोटी-सी काया मिली,इच्छाएँ भी न्यून
छोटे-से आकाश में,खुशियाँ फैलें दून

पेट तुम्हारा है बड़ा,धरती घेरे खूब
परजीवी बन चर रहा,इसकी-उसकी दूब


सावधान लघु से रहो,सदा उठाये सूंड़
चींटी मारेगी तुझे,तू अज्ञानी,मूढ़