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17 मार्च 2013

मोबाइल में गूगल हिंदी इनपुट से कैसे लिखें ??


17/03/2013 को नवभारत टाइम्स में !
                   
      
काफ़ी लम्बे इंतजार के बाद गूगल ने ANDROID फ़ोन में हिंदी इनपुट के द्वारा लिखने की आसान सुविधा मुहैया करा दी है.ऐसा नहीं है कि इसके पहले लोग मोबाइल में हिंदी लिख नहीं पा रहे थे,पर google hindi input  से रोमन में लिखने के अभ्यस्त अधिकतर लोग अब आसानी से देवनागरी में लिख पाएँगे.इसके लिए उन्हें हिंदी की-बोर्ड पर टाइप करने के बंधन से भी छुटकारा मिल जाता है.

Android के  Play store में Multiling keyboard ,Go keyboard ,Swift keyboard जैसे कई टूल अप्लीकेशन
पहले से मौजूद हैं पर इस टूल को स्थापित करना और इसका प्रयोग बेहद सरल है.इसको हम इस तरह समझते हैं.
सबसे पहले हम play store में जाकर google hindi input को सर्च करके उसे अपने फोन में INSTALL (चित्र 1) करते हैं.यह अपने आप आपके फोन में स्थापित हो जायेगा,फ़ोन में अलग से  यह दिखता नहीं है.इसके लिए आपको फोन की सेटिंग में जाना होगा.
सेटिंग में जाकर locale and text पर जैसे ही आप क्लिक करेंगे,पहले से मौजूद की-बोर्ड के साथ google hindi input का विकल्प आपको दिखेगा, चित्र (2) जैसा. आप इसमें इसे सेलेक्ट /इनेबल कर लें.इसके बाद इसी के नीचे दी गई इनपुट सेटिंग को क्लिक करिये,चित्र (3).input setting में आए हुए सभी विकल्प (चित्र 4)सक्षम/इनेबल कर दीजिए.
इसके बाद locale and text में ही आपको select input method मिलेगा,जहाँ आप (चित्र 5) google hindi input चुन लें.बस,अब आप तैयार हैं,ईमेल,फेसबुक,ब्लॉग आदि पर मोबाइल से हिंदी लिखने के लिए.यह बिलकुल निःशुल्क है और ऑफलाइन काम करता है.(चित्र 6)

टिप्स :जैसे ही आप नया सन्देश देने के लिए क्लिक करेंगे,आपको यह की-बोर्ड दिखेगा.स्पेसबार में ENGLISH लिखा होने पर आप ठीक इसके बाईं ओर (a=)को हल्का सा टच करना होगा,’हिंदीलिखा हुआ आ जायेगा.की-बोर्ड वही आपका qwerty key board रहेगा,जिसमें अभी आपको लिखने की आदत है.’नमस्तेलिखने के लिए Namaste टाइप करने के बाद स्पेस बार लिखते ही शब्द आप जहाँ लिखना चाहते हैं,लिख जायेगा.आपके वांछित शब्द के साथ अन्य विकल्प भी आते हैं,जिन्हें आप सुविधानुसार चुन सकते हैं.इसके लिए यदि वह पहले क्रम में नहीं है तो उसे टच करके लिख सकते हैं.’क्षको ksh को ri टाइप करके पा सकते हैं.(चित्र 7)

अगर आप हिंदी की-बोर्ड से ही लिखना चाहते हैं तो स्पेसबार के बायें से दूसरी बटन को हल्का टच करके उससे लिख सकते हैं(चित्र 8).लांग-प्रेस करने पर यह दूसरे की-बोर्ड का विकल्प देता है.
अंक लिखने के लिए qwerty keyboard में ही लांग-प्रेस करके रोमन और अरेबिक अंकों का विकल्प मिल जाता है.नीचे सबसे बाईं बटन (?12) को दबाकर भी अंक और स्माइली का विकल्प मिटा है.इसके लिए ड्रैग करने की ज़रूरत भी नहीं पड़ती.स्माइली पर क्लिक करते ही ढेर सारे विकल्प आ जाते हैं.
इसकी खास विशेषता है कि आप एक ही की-बोर्ड का प्रयोग करते हुए हिंदी,अंग्रेज़ी लिख सकते हैं वह भी वर्ड-प्रिडिक्शन के साथ.अलग से डिक्शनरी डाउनलोड करने की ज़रूरत नहीं है.
इस की-बोर्ड पर काम करते समय यदि आप एड्रेस-बार पर यूआरएल टाइप करते हैं तो यह स्वतः अंग्रेज़ी वाले मोड में आ जाता है.साथ ही यदि आप फ़ोन के कांटैक्ट में जाकर नंबर सर्च करते हैं तो भी हिंदी के साथ रोमन का विकल्प भी आता है,जिससे आसानी होती है
इसमें हिंदी से अंग्रेजी और अंग्रेजी से हिंदी में शिफ्ट होना भी बहुत आसान है,बस बगल वाली बाईं बटन को हल्का सा टच देकर ऐसा किया जा सकता है.स्पेसबार को ही यदि लॉन्ग-प्रेस कर देंगे तो आप अपने दूसरे की-बोर्ड पर भी तुरंत शिफ्ट हो सकते हैं.इस तरह हिंदी में लिखने का यह मौजूदा विकल्पों में सबसे बढ़िया है. किसी तरह के सवाल के लिए आप chanchalbaiswari@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं.

**HTC के फ़ोन में इसे इंस्टाल करने के बाद language and keyboard में जाकर गूगल हिंदी इनपुट इनेबल कर दें.इसके तुरंत बाद नोटिफिकेशन में जाकर SELECT INPUT METHOD  में इसे सेलेक्ट कर लें !
 

29 जनवरी 2011

बीबीसी की हिंदी सेवा !

दो दिन पहले ख़बर आई कि हम सबको सालों-साल  ख़बरदार करती आई बीबीसी की हिंदी सेवा बस चंद दिनों की मेहमान है.यह ख़बर शायद आज के ज़माने में एक हाशिये भर की ख़बर बन कर रह गयी है.प्रसारणकर्ताओं  ने धन की कमी का रोना रोया है. हो सकता  है की यह सेवा कमाऊ न रह गयी हो पर सार्वजनिक -हितों के लिए इसका ज़ारी रहना न केवल हिन्दुस्तान के लोगों के लिए अपितु विश्व-बिरादरी के लिए भी ज़रूरी है.

हम अपने बचपन को याद करते हैं, जब  शहर के भद्रजनों से दूर,अखबारी दुनिया से महरूम गाँव  के अधिकाँश लोग बीबीसी की हिंदी-सेवा का 'टैम' देखते रहते थे.जब कोई खास राजनैतिक घटना होती तो लोग झुण्ड बनाकर पूरा कार्यक्रम सुनते,और जो लोग नहीं सुन पाते वे दूसरों की जुबानी सुनते. लोग अपनी बहस में बीबीसी का हवाला भी देते.अब जबकि गाँव में संचार के आधुनिक साधन आ गए हैं, अखबार  भी पहुँचने लगे हैं,पुराने लोगों में बीबीसी का क्रेज़ जस-का-तस है !

बीबीसी की ख़ास पहचान बिना किसी पक्ष के,लाग-लपेट के निडर टिप्पणी अपने श्रोताओं तक पहुंचाने में है.कई अख़बारों का निचोड़ इसमें निकल आता है,साथ ही ज्ञान-विज्ञान व साहित्य सम्बन्धी समाचार भी इसकी ज़द में रहे हैं.इसका इतिहास कई महत्वपूर्ण रपटों से भरा पड़ा है.पत्रकारीय-जगत की कई महान हस्तियाँ यहाँ से जुड़ी व निकली हैं .

ऐसी संस्था ,जो इतने व्यापक स्तर पर समाजसेवा जैसा कार्य कर रही हो,उसे धनाभाव के कारण दम तोड़ना पड़े,बताता है कि मानव ने दर-असल किस तरह की विकास-यात्रा की है! आज हमारा सारा ध्यान अपने कोश को बढ़ाने में लगा है,भले ही इसके लिए हम अपने मानसिक आनंद को तिलांजलि दे दें ! ऐसी कोश-वृद्धि किस काम की जिससे लोगों को सुख व आनन्द न मिले ! इसका समाधान कोई व्यापारिक-समूह या भारतीय सरकार अगर करती भी है तो  उसके अपने हितों की कीमत पर होगा.


हम तो इसे बचाने के लिए बस एक ऐसी मौन-प्रार्थना कर सकते हैं,जो शायद उन तक पहुँच भी न सके जहाँ इसे पहुंचना चाहिए !

18 जनवरी 2011

मोबाइल और हिंदी !

मेरा मोबाइल से इश्क़ काफी पुराना है. पिछले तीन सालों में हमने कोई पाँच मोबाइल  बदले होंगे.जैसे-जैसे नए फ़ीचर आते गए,हम उन्हीं  के साथ  अपना शौक बदलते रहे.यह शौक मुझे काफ़ी  महंगा भी पड़ा है.कई बार कम दामों में उन्हें हटाना पड़ा और यह निहायत फ़िजूलखर्ची कही जा सकती है !फ़िलहाल  जो फ़ोन मैंने धारण किया हुआ है ,उसी के बारे में बात करते हैं.

काफ़ी सर्च और रिसर्च के बाद मैंने दो महीने पहले सैमसंग का गैलेक्सी एस (GT -I9000) पूरे अट्ठाईस हज़ार रुपये में लिया था,पर पूरी संतुष्टि फिर भी नहीं थी.इसका कारण यह था कि ढेर सारे फ़ीचर होने के बावज़ूद इसमें अन्य android फ़ोन की तरह हिंदी अक्षरों की जगह चौकोर गड्ढे  दिखाई देते थे और मेरा मन एकदम से उकता जाता था .नोकिया को हिंदी-समर्थन के रहते भी पसंद इसलिए नहीं किया था कि  उसमें हैंग  होना और ऑन-ऑफ़ होना आम बात हो गयी थी.

हिंदी के बारे में  मेरी कई मित्रों से भी चर्चा हुई थी,पर android के किसी version में इसके समर्थन की कोई खबर नहीं थी. मैं यूँ ही जिज्ञासावश इस फ़ोन को 2 .2 (foroyo ) में अपग्रेड कराने सैमसंग के सेवा-केंद्र में पिछले हफ़्ते  पहुँच गया.बड़ी देर के इंतज़ार  के बाद जब फ़ोन मेरे हाथ लगा तो मैं तब भी इसे सहज रूप से ले रहा था.जैसे ही मैंने मेल पर sign in   किया,सच बताऊँ ,मेरी ख़ुशी संभाले नहीं संभल रही थी.हिंदी बिलकुल साफ़ -साफ़ दिख रही थी. मेरी तो सचमुच लॉटरी  निकल आई थी.मैं इतना खुश तो उस दिन भी नहीं  था,जब इसे लिया था.

मैंने फटाफट अपने साथियों प्रवीण पाण्डेय और प्रवीण त्रिवेदी   को  यह  खुशखबरी  दी .मुझे  तकनीकी की  थोड़ी-बहुत ही समझ है,इस नाते केवल हिंदी पढ़ पाना ही मेरे लिए बड़ी उपलब्धि हो गई हालाँकि हिंदी की-बोर्ड का  इसमें अभाव है.अभी तक इस फ़ोन को अपग्रेड कराने के जो फ़ायदे मैं समझ पाया हूँ वह इस तरह से हैं:

१.केवल कुछ जगहों को छोड़कर हिंदी की आधुनिकतम व स्पष्ट  छाप(प्रिंट) है.
२.voice search   की सुविधा,जिसमें बोलकर आप english लिख सकते हैं. 
३.लिखते समय शब्दों के बीच में insert का विकल्प.
४. pressreader नामक अनुप्रयोग,जिसमें हिंदी  पत्रिका कादम्बिनी व नंदन पूरी की पूरी व साफ़-साफ़ पढ़ी जा सकती हैं.इसमें हिंदी व english के अखब़ार भी शामिल हैं.हालाँकि ज्यादा लाभ लेने के लिए मामूली ख़र्च भी है.english अखब़ार को पढ़कर सुनाने की सुविधा . 
५.ब्लॉग या किसी लेख पर जाने पर copy ,search व share का भी विकल्प.

फिलहाल मेरा गैलेक्सी एस अब मेरा चहेता बन गया है और निकट भविष्य में मैं इसे बदलने भी नहीं जा रहा हूँ.अब मैं अपने ब्लॉग पर आई हुए टीपों को तुरंत पढ़ सकता हूँ,अपने पसंदीदा ब्लॉग, गूगल रीडर  व हिंदी अखबार ,पत्रिकाएं आराम से पढ़ सकता हूँ.वास्तव में अब यह स्मार्ट हो गया है.इसके लिए गूगल व सैमसंग का आभार !