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19 अक्टूबर 2012

नई प्रार्थना !

हे दुर्गा  !
कभी उनका भी करो मर्दन
फाड़ दो छाती जो चौड़ी है दंभ से
पी रहे दिन-रात लहू हम सभी का
बनकर रक्तबीज
जो बढ़ रहे हर रोज़
क्या तुम भी इन्हें देखकर सहम गई हो ?

हे काली !
कभी आओ बन के कहर
कलियुग के असुरों पर ,
टूट पड़ो अचानक
भर लो अपना खप्पर
दिखा दो कि संज्ञाशून्य नहीं हो तुम
या किस प्रलय की प्रतीक्षा है ?

हे शंकर !
बजा दो डमरू
इन बहरे कानों पर
दिखा दो तांडव
कर दो रक्त-रंजित आसुरी-राज
मचा दो प्रलय
बेध दो त्रिशूल से
इनके दर्पयुक्त  माथे
बन जाओ शिव
या ऐसे ही मारे जायेंगे तुम्हारे भक्त ?

हे साईं  !
कभी उन पर दया मत करो
जो चढाते हैं तुम पर करोड़ों
बनाते हैं मोटा माल
और हड़पते हैं दूसरों का हिस्सा
अपना हाथ हटा लो
ऐसे न बांटो बख्शीश
तुम्हें देकर रिश्वत
वे पा रहे हैं अभयदान
तुम्हारा भक्त आज क्यों है सवाली ?

 

30 जुलाई 2012

नीके दिन भी आइहैं !

भ्रष्टाचारी-बेल अब ,दिन प्रति बढ़ती जाय |
साँस उखड़ती जा रही,आस गई कुम्हिलाय ।।

रहे रहनुमा नाम के,देश बेंच कर खाँय ।
जन्मभूमि की आबरू,देते रोज़ गवाँय ।।

हवा और माटी कहे,मिली तुम्हारे खून।
काहे के हो रहनुमा,झूठे सब कानून ।।

सत्ता-मद में डूबकर ,भूल गए आचार ।
नारायण के भेष में,फ़ैल रहा व्यभिचार ।।

डरता है ईमान अब,उखड़ रहे हैं पाँव ।
भ्रष्टाचार बदल रहा,रोज़ पुराने दाँव ।।

तुलसी मद किसका रहा,सदा एक-सा काल ।
आह करेगी राख सब,साखी दीनदयाल ।।

लहर चली छोटी सही,यही बनेगी ज्वार ।
नीके दिन भी आइहैं,तू मत हिम्मत हार ।।



11 जून 2012

चिरकुट-चूहों से बचाओ !

आदरणीय प्रधानमंत्रीजी,
बहुत दुखी मन से यह पत्र लिख रहा हूँ।देश में ज़बरदस्त संकट की स्थिति पैदा हो गई है।सुना है,चूहे तीन करोड़ का अनाज खा गए हैं।यह बहुत ही गंभीर मसला है।ये हमारा बजट था ,इसे दूसरा कैसे उड़ा सकता है?हम तो कहते हैं कि तुरत ही संसद का विशेष सत्र बुलाया जाए और इस पर बहस हो।एक संसदीय समिति से इसकी जांच भी कराई जाय कि हमारे बहादुरों के रहते ये सब हुआ कैसे ?

तीन करोड़ की रक़म यूँ ही जाया हो जाए,यह हम सब सहन नहीं कर सकते हैं।यह हमारे मौलिक-अधिकारों पर डाका है और इसे हम बिलकुल बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं।कालेधन को लेकर इतना शोर किया जा रहा है,अगर वह आ भी गया तो वह हमारे काम का नहीं है।उसे सफ़ेद करना पड़ेगा और उसमें समय लगेगा।जो धन हमारे पास पहले से ही चकाचक सफ़ेद है उसे हम ऐसे नष्ट नहीं होने देंगे ।उन चूहों की हमारे आगे बिसात ही क्या है? उन्होंने हमारी प्रभुसत्ता को ललकारा है इसलिए हम चुप नहीं बैठने वाले।


हमें किसी अन्ना से खतरा नहीं है पर जब बात हमारे अन्न की हो,पेट की हो तो यह बड़े खतरे का संकेत है।हमारे पुराणों  में अन्न को देवता कहा गया है और इन चूहों ने इस लिहाज़ से देवताओं पर आक्रमण किया है।अगर यह हाल देवताओं का हो रहा है तो फिर असुर कब तक सुरक्षित रहेंगे ?हमें किसी बाबा से भी कोई डर नहीं है क्योंकि वे सब मौका पाते ही कुतरने की जुगाड़ में लगे हैं।हम अपने जीते जी यह नहीं होने देंगे ।संसद के हमले के बाद यह बड़ा वाकया है .हमारी सत्ता को चूहों ने चुनौती दी है  इसलिए यह छोटा-मोटा मसला नहीं है,गंभीर आपदा  का समय है, हमारे अस्तित्व का प्रश्न है।अगर हम अभी एकजुट नहीं हुए तो कब होंगे ?

तीन करोड़ की रकम इतनी मामूली भी नहीं है।इस मद से हमारे यहाँ कम से कम दस टायलेट बन सकते हैं  जिनमें हमारे भाई-बिरादर बैठकर गंभीर-चिंतन करते ! इन चूहों ने अनजाने में ऐसा नहीं किया है।यह एक साजिश है हमें भूखों मारने की।हमने अपना सब-कुछ इस देश के लिए न्योछावर कर दिया है और लगातार इसी प्रयास में लगे हैं।हमने इस देश की सेवा में अपना पूरा परिवार झोंक दिया है ।अगर चूहे इस देश के मद को ऐसे खर्चने लगेंगे तो हमारे बिलों का क्या होगा? ये चूहे तो खा-पीकर अपने बिलों में मस्त घूमेंगे पर हम देश-सेवा को तरसते रह जायेंगे ।इस सबका सबसे बड़ा खतरा यह है कि चिरकुट-टाइप के चूहे इसका स्वाद पाकर और जोर से हमले करेंगे और सारे बिलों पर उन्हीं का कब्ज़ा हो जायेगा ।

इस ज्ञापन के द्वारा आपको हम सचेत करते हैं कि कम से कम अब तो जाग जाओ।अभी तक हमारे ऊपर सीधा हमला नहीं हुआ था,इसीलिए हम चुप बैठे थे।इन चूहों ने आज तीन करोड़ खाए हैं,कल हमें भी कुतरना शुरू कर देंगे।इन चिरकुट-टाइप चूहों से सख्ती से निपटने की ज़रुरत है नहीं तो हमारे खिलाड़ी और अफसरटाइप चूहों की प्रजाति पर ही संकट उत्पन्न हो जायेगा ! इस पर आप जल्द से जल्द एक सर्वदलीय बैठक बुलाकर आगे की रणनीति तय कर लें। इन चूहों को हमें ऐसा सबक सिखाना है कि इनकी सात पुश्तें अनाज को देखकर डरें और अन्न खाना ही भूल जांय !

उम्मीद है कि इस पत्र को आप वरीयता के आधार पर लेंगे और इस प्रकार  लोकतंत्र और हमारे मौलिक अधिकारों की रक्षा करेंगे ।                                                                              


                                                 आपका ही 
                                                         देश का प्रमाण पत्र धारी सेवक    
                                                                                                                   
                                                                                                                  

9 दिसंबर 2011

चार क्षणिकाएँ !

(१ )

भ्रष्टाचार 
मुँह बाए खड़ा है,
हमारी उखड़ती  साँसों को गिनता,
जान के पीछे पड़ा है,
सब्र के आगे अड़ा है !!
साभार:गूगल बाबा 


(२)


नेता 
अब ऐसा विषय है,
सोचने में भी प्रलय है,
कह दिया कुछ जो इन्हें ,
सुकून का अंतिम  समय है,
हर तरफ पहरे हमारे 
और पहरों में भी भय है !!


(३ )


राजनीति
सबकी चहेती,
सबको इसी से प्यार है,
जो गुलाटी मार ले,
वह बची सरकार है !
देश है अब 'सेल ' पर ,
इससे न  सरोकार है ,
व्यापारी को दरकार है,
उसी की पैरोकार है !




(४ )

एक बूढ़े से
क्रांति की उम्मीद में हम
लगातार उसको ताक रहे हैं,
अँधेरी कोठरी में चंद जुगनू लिए 
हम झांक रहे हैं .
रोशनी जब चीरकर घुस आएगी ,
इस अँधेरे की तभी,
सचमुच में शामत आएगी !!






17 जून 2011

सरकार का प्रेस-नोट !

हम सभी देशवासियों को साफ़ सन्देश देना चाहते हैं.पहले भी कई मौकों पर अपनी प्रतिबद्धता हम जता चुके हैं और आज फिर दोहरा रहे हैं कि  इस देश में हम जैसा चाहेंगे वैसा ही होगा ! इन टुटपुंजिया अनशनों और ग्लैमरस-आंदोलनों से कुछ भी नहीं होने वाला है.हमने घाघ नेताओं,मठाधीशों को निपटा दिया तो आजकल के बाबा और महात्मा किस खेत की मूली हैं ? इसलिए 'जनलोक पाल' को हम अपने तरीके से, अपनी चाकरी में पालेंगे न कि अपने घोड़े की लगाम किसी और के हाथ में दे देंगे !

साभार:गूगल सरकार
पिछले कुछ दिनों से देश भर में अराजकता का माहौल बनाया जा रहा है.लोग कहते हैं कि मंहगाई बढ़ रही है पर रिकॉर्ड बोलते हैं कि लोग भूख से बिलकुल नहीं मर रहे हैं,बल्कि वे तो 'अनशन' से शौकिया ही मरने पर उतारू हैं !ये लोग वास्तव में ढोंगी हैं,जिनको मरना होता है वह चुपचाप 'सरक' लेता है,निगमानंद की तरह ! यूँ ढोल-नगाड़े बजाकर मजमा नहीं इकठ्ठा करता है.

देश के लोगों ने देखा है कि योग-गुरु की बत्ती  हमने कैसे बुझाई है? पहले तो उसको भाव दिखाकर अपने पक्ष में बयान दिलवा दिया कि प्रधानमंत्री और मुख्य-न्यायाधीश को लोकपाल के फंदे से बाहर रखा जाये बाद में जब वह हमसे सौदा न करके संघ की शरण में जाने लगा तो ऐसा दौड़ाया कि इस ज़िन्दगी में दोबारा दिल्ली में अनशन करने की नहीं सोचेगा .अब अन्ना नाम के महात्मा को भी सबक सिखाने की ज़रुरत है.उत्तर-भारत में अन्ना का मतलब 'छुट्टा-जानवर' से होता है ,पर हम उसको इतना छुट्टा नहीं होने देंगे कि वह बेकाबू हो जाये!हम दूसरों को अपने खूंटे में बाँधते हैं,न कि उसके खूंटे से बंधते हैं !इसमें अपनी  जात-बिरादरी,माफिया,कार्पोरेट घराने या बड़ी मछलियाँ अपवाद हैं !

कितनी बेतुकी मांगे इस 'नागरिक-समाज'  की तरफ से उठाई जा रही हैं? भला किसी देश के प्रधानमंत्री पर कोई उँगली उठाई जा सकती है!आखिर अपने देश की इज्ज़त का सवाल है.यह इस बात से भी प्रमाणित होता है की  कोई भी विपक्षी दल इस माँग का समर्थन नहीं कर रहा है.इन दलों ने बाबा की सेवा के बाद राजघाट में नाच-गाना प्रस्तुत किया ,पर महात्मा की इस माँग पर चुप्पी साध ली हैं.यह हमारे प्रजातंत्र की एकता और असलियत है.


अब हम किसी से डरनेवाले नहीं हैं और ये निश्चित कर लिया है कि  इस देश में कानून किसी को हाथ में नहीं लेने देंगे,वह साठ सालों से सुरक्षित हाथ में है.इन अनशनकारियों को ऐसा सबक सिखा देंगे कि ज़िन्दगी-भर अनशन के नाम से तौबा करेंगे !हम कोई भी कानून संसद में अपने लोगों के बीच आम-सहमति से बनाने की प्रक्रिया का पालन करेंगे,न कि किसी तम्बू या सड़क पर संविधान को बेपर्दा करेंगे !हम ऐसे मामलों पर त्वरित कारवाई करेंगे भले ही कसाब और अफजल को कोई छुडा ले जाए !

उम्मीद है कि  हमारी नसीहत को फरमान माना जायेगा,हमारे सभी हथियार पुलिस,नौकरशाही और माफिया भ्रष्टाचार और काले धन से सज्जित होकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूर्ववत करते रहेंगे ! हम गाँधी के सपनों का भारत बनाकर दिखायेंगे ,इस काम में सरकार का हाथ आपके साथ है !

4 जून 2011

लाल किले से बाबा लाइव !


भ्रष्टाचार के खिलाफ बिगुल बज चुका है,देशव्यापी अभियान चल रहा है,राम लीला मैदान  में देश के हर कोने से लोग इकठ्ठा हुए हैं,लगभग हर चैनल-वाला पूरी तरह से लहालोट है! इन सबका आखिरी निशाना लाल किला ही है ! लगता है देश में भ्रष्टाचार कहीं हैं भी ? इतने सारे लोग अगर इसके खिलाफ हैं तो हर कार्यालय,हर जगह ये कौन-से लोग हैं जो भ्रष्टाचारी हैं ?

सब अपने से बड़े भ्रष्टाचारी पर वार कर रहे हैं.न तो बाबा,न उनके चेले और न ही मीडिया इस मामले में पूरी तरह पाक-साफ है .मीडिया अपनी कमाई किस तरह से आज कर रहा  है,सबको पता है !आन्दोलन को कवर करने के लिए 'स्लॉट' बिक चुके हैं ,खूब स्पॉन्सर भी मिल गये हैं !

बहुत 'खुशी' का माहौल बनाया जा रहा है,ढोल-नगाड़े बजाकर इस आन्दोलन को 'अभिजात्य-टच ' दिया जा  रहा है .धरना-स्थल एक 'सेलेब्रिटी' बन गया है . यदि महात्मा गाँधी होते तो आज अपने इस हथियार पर उन्हें पुनर्विचार करने की ज़रूरत महसूस होती !

जिस प्रकार राम-मंदिर का मुद्दा ठीक था,पर उसके पीछे लोगों का उद्देश्य गलत, ठीक उसी प्रकार भ्रष्टाचार का मुद्दा ठीक है, पर इसके पीछे जुटे कुछ लोगों के उद्देश्य बिलकुल अलग हैं.लोगों के लिए केन्द्र का भ्रष्टाचार और कर्नाटक-जैसे राज्यों के भ्रष्टाचार अलग-अलग है !

स्वयं ईमानदार बनने से रोकने को किसने कहा है,पर इस बारे में उपदेश तो खूब मिल रहे हैं पर अमल करनेवाले बिरले ही हैं ! इसीलिए आज ईमानदारों  का टोटा है.जो एक-आध होते हैं उनको भी सरकारें सुरक्षा नहीं दे पातीं !आज जो सरकार के अंग नहीं हैं वे कल थे और कल होंगे पर उनकी प्राथमिकताएं बदल जाएँगी !

मेरी शुभकामनाएं  इस मुद्दे के साथ हैं ,पर यहाँ सारी कवायद काले-धन को सफ़ेद धन में बदलने की हो रही है !

10 अप्रैल 2011

एक खत अपनों के नाम !

हर भेष में,हर देश में !
अन्ना हजारे के अनशन से खुश होने वालों से मैं एक बात कहना चाहता हूँ कि उन्हें ज़्यादा खुशी जताने या फुदकने की ज़रूरत नहीं है.ऐसे लोगों की संख्या उँगलियों में गिनने लायक है जो किरण बेदी या अरविन्द केजरीवाल के बहकावे में आ गए हैं.दर-असल उन्हें हमारी ताकत और एकजुटता,प्रतिबद्धता का रंचमात्र अनुमान नहीं है.हम अपनी बिरादरी को आश्वस्त करते हैं कि उन्हें तनिक भी घबडाने की ज़रूरत नहीं है.अपनी आबादी के आगे ये मुट्ठीभर लोग क्या कर लेंगे?

हम लोग पिछले पचास-साठ सालों से यूँ ही  भाड़ नहीं झोंक रहे हैं .हमने अपनी ताकत में लगातार इजाफा किया है.अपने लोगन क हम तनी अपनी बोली मा समझाय देइ कि हमैं संगठन के लोग हर दल,हर कोनवा और हर ठीहे पे मिल जइहैं .सबते बड़ी बात या है कि हर सरकार मा हमरी साझेदारी है !यहिते अन्ना के अनशन ते घबड़ाय के तनिकौ ज़रूरत ना है !

हम लोग बीते सालों में समाज में इतने घुल-मिल गए हैं कि दूसरी प्रजाति लुप्त होने की कगार पर है.उसी प्रजाति के बचे-खुचे लोग अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं.एक बात यह भी है कि ऐसे कुछ लोग मौका पाते ही हमारी बिरादरी में शामिल हो जाते हैं .इसलिए भी अपने अस्तित्व और भविष्य की चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि हमारे आका लोग अपनों को बचाने के लिए इस बिल में भी छेद कर देंगे !हमें अपने काम को थोड़ा सतर्कता और होशियारी से करना पड़ेगा .कुछ दिन तक पुरानी दर पर ही काम करना पड़ सकता है,इसलिए बाल-बच्चों को थोड़ा तकलीफ हो सकती है !

इसलिए आखिरी जश्न तो हम ही मनाएंगे और फिर इस बिल को तो अभी पास भी तो होना है.इसमें पलीता लगाने की कोई न कोई तरकीब ज़रूर निकल आयेगी !हम लोग इसलिए भी चिंतित नहीं हैं क्योंकि कानून तो पहले के भी कोई कम नहीं बने हैं.हमारी बिरादरी बिंदास होकर अपना काम करे,ये थोड़े समय का बुलबुला है,जल्द ही  पिचक जायेगा !

और हाँ,तब तक अन्ना हजारे जी के हर कार्यक्रम में आप सब लोग ढोल-नगाड़े लेकर अपनी उपस्थिति अवश्य दर्ज कराते रहें !