हे दुर्गा !
कभी उनका भी करो मर्दन
फाड़ दो छाती जो चौड़ी है दंभ से
पी रहे दिन-रात लहू हम सभी का
बनकर रक्तबीज
जो बढ़ रहे हर रोज़
क्या तुम भी इन्हें देखकर सहम गई हो ?
हे काली !
कभी आओ बन के कहर
कलियुग के असुरों पर ,
टूट पड़ो अचानक
भर लो अपना खप्पर
दिखा दो कि संज्ञाशून्य नहीं हो तुम
या किस प्रलय की प्रतीक्षा है ?
हे शंकर !
बजा दो डमरू
इन बहरे कानों पर
दिखा दो तांडव
कर दो रक्त-रंजित आसुरी-राज
मचा दो प्रलय
बेध दो त्रिशूल से
इनके दर्पयुक्त माथे
बन जाओ शिव
या ऐसे ही मारे जायेंगे तुम्हारे भक्त ?
हे साईं !
कभी उन पर दया मत करो
जो चढाते हैं तुम पर करोड़ों
बनाते हैं मोटा माल
और हड़पते हैं दूसरों का हिस्सा
अपना हाथ हटा लो
ऐसे न बांटो बख्शीश
तुम्हें देकर रिश्वत
वे पा रहे हैं अभयदान
तुम्हारा भक्त आज क्यों है सवाली ?
कभी उनका भी करो मर्दन
फाड़ दो छाती जो चौड़ी है दंभ से
पी रहे दिन-रात लहू हम सभी का
बनकर रक्तबीज
जो बढ़ रहे हर रोज़
क्या तुम भी इन्हें देखकर सहम गई हो ?
हे काली !
कभी आओ बन के कहर
कलियुग के असुरों पर ,
टूट पड़ो अचानक
भर लो अपना खप्पर
दिखा दो कि संज्ञाशून्य नहीं हो तुम
या किस प्रलय की प्रतीक्षा है ?
हे शंकर !
बजा दो डमरू
इन बहरे कानों पर
दिखा दो तांडव
कर दो रक्त-रंजित आसुरी-राज
मचा दो प्रलय
बेध दो त्रिशूल से
इनके दर्पयुक्त माथे
बन जाओ शिव
या ऐसे ही मारे जायेंगे तुम्हारे भक्त ?
हे साईं !
कभी उन पर दया मत करो
जो चढाते हैं तुम पर करोड़ों
बनाते हैं मोटा माल
और हड़पते हैं दूसरों का हिस्सा
अपना हाथ हटा लो
ऐसे न बांटो बख्शीश
तुम्हें देकर रिश्वत
वे पा रहे हैं अभयदान
तुम्हारा भक्त आज क्यों है सवाली ?


