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25 सितंबर 2012

गाँठ पड़ना ठीक है !


गाँठ जो है
तेरे मेरे बीच,
बाँधती भी है
अलगाती भी है।

गाँठ जो खुलती है
तेरे मेरे बीच,
राह बढ़ती है,
तन्हा छोड़ जाती है ।

गाँठ गर पड़ती नहीं
तेरे मेरे बीच,
एक-दूजे की अहमियत
समझ में आती नहीं ।

गाँठ का बँधना सदा
पक्का नहीं होता,
इतनी कसावट में भला
सहजता टिक पाती कहीं ।