22 जुलाई 2026

चुप्पी

 चुप्पी के भी अर्थ बड़े हैं 

यूँ ही ताले नहीं जड़े हैं


संविधान को घोट रखा है 

लोकतंत्र की राह अड़े हैं


बच्चों को पुचकारी देकर 

डंडा-लाठी लिए खड़े हैं।


पेपर लीक तमाशा लगता 

रोजगार ख़ुद लिए पड़े हैं


आँसू सूख चुके हैं उनके 

अब तो केवल काँट गड़े हैं।


दुनिया उलट-पुलट हो जाए 

कुर्सी र ज़ुबाँ जकड़े हैं


मौन तभी टूटेगा अब तो 

राम कहेंप्रभु आप बड़े हैं


-संतोष त्रिवेदी 







6 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 29 जुलाई 2026 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. संविधान को घोट रखा है
    लोकतंत्र की राह अड़े हैं ।
    यही सच है

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