तबीयत कुछ ठीक सी ,रहती नहीं अब ,
बगैर किसी मर्ज़ के,बीमार हुआ जाता हूँ !१!
खामोश हूँ,पर होश में हूँ मैं अभी,
ढहते हुए शहर में,मीनार हुआ जाता हूँ !२!
बुरे दिन भी ये ,कितने हसीन होते हैं,
जंगल से निकलके ,घर-बार हुआ जाता हूँ !३!
कोई समझ न पाए,दास्तां मेरी ,
धीरे-धीरे मैं भी ,ख़बरदार हुआ जाता हूँ !४!
अब दर्द को भुलाने की बात भूलकर,
ग़म के साथ रहके ,प्यार हुआ जाता हूँ !५!
बगैर किसी मर्ज़ के,बीमार हुआ जाता हूँ !१!
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| साभार:गूगल बाबा |
खामोश हूँ,पर होश में हूँ मैं अभी,
ढहते हुए शहर में,मीनार हुआ जाता हूँ !२!
बुरे दिन भी ये ,कितने हसीन होते हैं,
जंगल से निकलके ,घर-बार हुआ जाता हूँ !३!
कोई समझ न पाए,दास्तां मेरी ,
धीरे-धीरे मैं भी ,ख़बरदार हुआ जाता हूँ !४!
अब दर्द को भुलाने की बात भूलकर,
ग़म के साथ रहके ,प्यार हुआ जाता हूँ !५!
