आदमी काफ़ी भला है
काटता सीधा गला है।
आइना भी फेरता मुँह
आसमानी वो बला है ।।
जो देखता लिखता वही
डर नहीं है,बावला है ?
राम की कुटिया लुटी है
नदी में दीपक जला है।
सुरमई आँखों में पानी
उसे अपनों ने छला है।
- संतोष त्रिवेदी
आदमी काफ़ी भला है
काटता सीधा गला है।
आइना भी फेरता मुँह
आसमानी वो बला है ।।
जो देखता लिखता वही
डर नहीं है,बावला है ?
राम की कुटिया लुटी है
नदी में दीपक जला है।
सुरमई आँखों में पानी
उसे अपनों ने छला है।
- संतोष त्रिवेदी
लोकतंत्र आबाद रहेगा बरसों तक
रावण आज ज़रूर मरेगा, पगला है तू !
जब-जब पाप बढ़ेंगे भू पर ,प्रभु आएँगे
नेता उनका रूप धरेगा,पगला है तू !
हाकिम का दरबार भरा है चोर-लुटेरों से
ये बातें अख़बार लिखेगा,पगला है तू !
भारत होगा विकसित सन् सैंतालिस में अब
तब सारा संसार झुकेगा,पगला है तू !
वोट हमारा,तंत्र हमारा,संविधान है अपना
नहीं कभी इंसाफ़ बिकेगा,पगला है तू !!
- संतोष त्रिवेदी
दशहरा (20/102026)
सरकार हमरिही फिरिउ आइ
तुम चिल्लाओ यूपीआइ।
जीडीपी कै ग्रोथ बढ़ी है
तुम्है द्याँह मा चरबी छाइ।
काम तो करिहैं पूरा वई
ट्रंप के आगे झुकि झुकि जाइ ।
बोकला ल्याहैं छीलि तुम्हार
तुम्हई समझ मा मुला न आइ।
रुपिया अउँधा डॉलर आगे
अब मुर्दा भै यूपीआइ !
आपनि सेहत ख़ूब चक्क है
हम तो भइया भैंसि चराइ !!
वह सवालों से परे है
देवता बनता फिरे है।
रंग उस पर फिट सभी हैं,
रूप ऐसा वह धरे है!
देस की पतवार साधे,
वह अकेला ही चले है।
गर्क बेड़ा हो भले ही,
हृदय में ज्वाला भरे है!
लिख रहा है खूब बेहतर,
शहद बातों से झरे है।
यह किताबी आदमी ही,
सच बताने से डरे है!
आदमी ख़ुद बन न पाया,
साँप की छाया तले है।
ज़ाहिलों का है समागम,
बुद्धि ख़ुद की ही हरे है!