20 अक्टूबर 2026

पगला है तू !

लोकतंत्र का राज रहेगा बरसों तक 

रावण आज ज़रूर मरेगा, पगला है तू !


जब-जब पाप बढ़ेंगे भू पर ,प्रभु आएँगे 

नेता उनका रूप धरेगा,पगला है तू !


हाकिम का दरबार भरा है चोर-लुटेरों से 

ये बातें अख़बार लिखेगा,पगला है तू !


भारत होगा विकसित सन् सैंतालिस में अब 

तब सारा संसार झुकेगा,पगला है तू !


वोट हमारा,तंत्र हमारा,संविधान है रखवाला 

नहीं कभी इंसाफ़ बिकेगा,पगला है तू !!


- संतोष त्रिवेदी 


दशहरा (20/102026)

15 सितंबर 2026

यूपीआई

सरकार हमरिही फिरिउ आइ 

तुम चिल्लाओ यूपीआइ।


जीडीपी कै ग्रोथ बढ़ी है 

तुम्है द्याँह मा चरबी छाइ।


काम तो करिहैं पूरा वई 

ट्रंप के आगे झुकि झुकि जाइ ।


बोकला ल्याहैं छीलि तुम्हार 

तुम्हई समझ मा मुला न आइ।


रुपिया अउँधा डॉलर आगे 

अब मुर्दा भै यूपीआइ !


आपनि सेहत ख़ूब चक्क है 

हम तो भइया भैंसि चराइ !!


14 सितंबर 2026

ग़ज़ल

 वह सवालों से परे है

देवता बनता फिरे है।

रंग उस पर फिट सभी हैं,

रूप ऐसा वह धरे है!

देस की पतवार साधे,

वह अकेला ही चले है।

गर्क बेड़ा हो भले ही,

हृदय में ज्वाला भरे है!

लिख रहा है खूब बेहतर,

शहद बातों से झरे है।

यह किताबी आदमी ही,

सच बताने से डरे है!

आदमी ख़ुद बन न पाया,

साँप की छाया तले है।

ज़ाहिलों का है समागम,

बुद्धि ख़ुद की ही हरे है!


7 सितंबर 2026

 घर में रहते घर ढहते, 

बाहर जाते पुल ढहते,

सड़कें धँसतीं, गड्ढे हँसते, 

वो केवल ‘फू-फा’ करते!


जान हमारी सबसे सस्ती, 

मौत की पूरी गारंटी,

अच्छे दिन फिर भी आए, 

दसों दिशाओं में कहते!


असमय जिसका लाल गया, 

माता विकल दुआर ताकती,

कब लौटेगा राजा बेटा, 

वो राहत का दम भरते!


लूट-खसोट औ कदाचार पर, 

बात अगर कोई करता,

नक्सल कहकर वो चिल्लाते, 

बिकी मीडिया संग बहते !


मंदिर लूट छला हिंदू को, 

ख़ुदा को भी बेदख़ल किया,

सब धर्मों को ख़ूब निचोड़ा, 

फिर ख़ुद को रक्षक कहते!


-संतोष त्रिवेदी