2 सितंबर 2026

अव्वल दर्जा

 वोट चुराकर वो उछले हैं,

जीडीपी में फिर फिसले हैं।

झूठा डाटा पेश कर रहे 

देखो वो कितने छिछले हैं!


आत्म-मुग्ध रहते ये हरदम,

काम कोई अच्छा है।

हारी बाज़ी हरदम जीतें,

लोकतंत्र के ये पुतले हैं!


देश की मिट्टी रोज़ कुरेदें,

पुरखों की मूरत ढँकते।

भाईचारा ताक पे रक्खा 

मछली ताके वो बगुले हैं!


रोज़ उठाए फिरते झोला,

तंत्र, न्याय सब मुट्ठी में।

जल, जंगल, ज़मीन सब बेचा,

मंदिर तक में अब घपले हैं!


हिंदू-मुस्लिम राग अलापें,

राष्ट्रवाद के चोले में।

हम तो समझ रहे थे दोयम,

अव्वल दर्जे के निकले हैं!


- संतोष त्रिवेदी

28 अगस्त 2026

अच्छे दिन

 अच्छे दिन तो अब आए हैं !

घर कै सक्कर महँगी होइगै,

गाड़ी सब एथनॉल सुरुकि गै।

रूपिया लुढ़कि पहुँचिगा सौ तक,

रोजगारौ सरकार डकरि गै॥

कर्ज़ामाफ़ी साहेब के भै,

रामदीन धक्का खाए हैं।

अच्छे दिन तो अब आए हैं !!

हम मंदिर-मसजिद भटकि रहेन,

वी साख बढ़ाए हैं बिदेस मा।

जब जब कस्ट मिलत पब्लिक का,

रील-रूप धरि लेत देस मा।

भक्त अउर भगवान क लूटैं,

यह समरसता लाए हैं।

अच्छे दिन तो अब आए हैं!!

धनी उड़ावैं मउज, बूड़ि गै

गाँव-गिराँव किसानी।

वोट लूटि ल्यो,देस लूटि ल्यो,

बचै न एकु निसानी।

रास्ट्र गीत रमदिनवा गावै,

तुम करौ ट्रंप-जजमानी।।

आँधरि-बहिरि बनायो पब्लिक,

पत्रकार सब बउराए हैं। 

अच्छे दिन तो अब आए हैं !!


-संतोष त्रिवेदी

20 अगस्त 2026

ग़ज़ल

 धर्म के धंधे पुराने हो गए,

धीरे-धीरे वो सयाने हो गए!


रक्त-रंजित जीभ लेकर घूमते,

बद-सियासत के ठिकाने हो गए।


दिन-दहाड़े लूटकर मंदिर चले,

रघुबीर भी उनके निशाने हो गए।


रात-दिन वो झूठ बोते,बाँटते,

सच सुने सच में, ज़माने हो गए।


इंतहा की आख़िरी शब आ गई,

क़ातिलों के दिन सुहाने हो गए !


• संतोष त्रिवेदी 

2 अगस्त 2026

माफ़ी

 जड़ से सबको साफ़ किया

फिर कहते हैं माफ़ किया !


लाठी-गोली बच्चों को दी

कहते हैं इंसाफ़ किया।


डायरबनकर हमला बोला 

कायर बनकर माफ़ किया।


जो भी सच की हाँक लगाता 

उसको वतन-ख़िलाफ़ किया।


फ़स्ल ज़हर की पकी खड़ी है 

काटो निकलो माफ़ किया !