2 अगस्त 2026

माफ़ी

 जड़ से सबको साफ़ किया

फिर कहते हैं माफ़ किया !


लाठी-गोली बच्चों को दी

कहते हैं इंसाफ़ किया।


डायरबनकर हमला बोला 

कायर बनकर माफ़ किया।


जो भी सच की हाँक लगाता 

उसको वतन-ख़िलाफ़ किया।


फ़स्ल ज़हर की पकी खड़ी है 

काटो निकलो माफ़ किया !


22 जुलाई 2026

चुप्पी

 चुप्पी के भी अर्थ बड़े हैं 

यूँ ही ताले नहीं जड़े हैं


संविधान को घोट रखा है 

लोकतंत्र की राह अड़े हैं


बच्चों को पुचकारी देकर 

डंडा-लाठी लिए खड़े हैं।


पेपर लीक तमाशा लगता 

रोजगार ख़ुद लिए पड़े हैं


आँसू सूख चुके हैं उनके 

अब तो केवल काँट गड़े हैं।


दुनिया उलट-पुलट हो जाए 

कुर्सी र ज़ुबाँ जकड़े हैं


मौन तभी टूटेगा अब तो 

राम कहेंप्रभु आप बड़े हैं


-संतोष त्रिवेदी 







10 फ़रवरी 2021

तुम्हारे लिए

 किसी के आँसुओं पर मत हँसो,

आह उसकी ख़ाक कर देगी तुम्हें।


तख़्त पर बैठा नहीं रहता कोई 

इक दिन जमीं ही आसरा देगी तुम्हें।


दक्षिणा देना ग़लत कब से हुआ 

पर रसीद उसकी गिरा देगी तुम्हें।


सियासी चाल चलिए ख़ूब लेकिन

धूल में भी ये मिला देगी तुम्हें ।

31 अक्टूबर 2020

शायर फिर बोला है !

 शायर फिर से बोला है,

ज़हर फ़िज़ा में घोला है।


रोज़ सियासत रिसती है,

जब भी मुँह खोला है।


कट्टरता,पाखंड में चुप्पी,

रंगा मज़हबी चोला है।


पक्के गाँधीवादी ठहरे,

हाथ ‘अहिंसा-गोला’ है।


मज़हब सबसे ऊपर है,

असली यही फफोला है।


‘हम सब मानव हैं पहले’

शायर क्यूँ ना बोला है !


—संतोष त्रिवेदी 


#MunawwarRana