28 अगस्त 2026

अच्छे दिन

 अच्छे दिन तो अब आए हैं !

घर कै सक्कर महँगी होइगै,

गाड़ी सब एथनॉल सुरुकि गै।

रूपिया लुढ़कि पहुँचिगा सौ तक,

रोजगारौ सरकार डकरि गै॥

कर्ज़ामाफ़ी साहेब के भै,

रामदीन धक्का खाए हैं।

अच्छे दिन तो अब आए हैं !!

हम मंदिर-मसजिद भटकि रहेन,

वी साख बढ़ाए हैं बिदेस मा।

जब जब कस्ट मिलत पब्लिक का,

रील-रूप धरि लेत देस मा।

भक्त अउर भगवान क लूटैं,

यह समरसता लाए हैं।

अच्छे दिन तो अब आए हैं!!

धनी उड़ावैं मउज, बूड़ि गै

गाँव-गिराँव किसानी।

वोट लूटि ल्यो,देस लूटि ल्यो,

बचै न एकु निसानी।

रास्ट्र गीत रमदिनवा गावै,

तुम करौ ट्रंप-जजमानी।।

आँधरि-बहिरि बनायो पब्लिक,

पत्रकार सब बउराए हैं। 

अच्छे दिन तो अब आए हैं !!


-संतोष त्रिवेदी

20 अगस्त 2026

ग़ज़ल

 धर्म के धंधे पुराने हो गए,

धीरे-धीरे वो सयाने हो गए!


रक्त-रंजित जीभ लेकर घूमते,

बद-सियासत के ठिकाने हो गए।


दिन-दहाड़े लूटकर मंदिर चले,

रघुबीर भी उनके निशाने हो गए।


रात-दिन वो झूठ बोते,बाँटते,

सच सुने सच में, ज़माने हो गए।


इंतहा की आख़िरी शब आ गई,

क़ातिलों के दिन सुहाने हो गए !


• संतोष त्रिवेदी 

2 अगस्त 2026

माफ़ी

 जड़ से सबको साफ़ किया

फिर कहते हैं माफ़ किया !


लाठी-गोली बच्चों को दी

कहते हैं इंसाफ़ किया।


डायरबनकर हमला बोला 

कायर बनकर माफ़ किया।


जो भी सच की हाँक लगाता 

उसको वतन-ख़िलाफ़ किया।


फ़स्ल ज़हर की पकी खड़ी है 

काटो निकलो माफ़ किया !


22 जुलाई 2026

चुप्पी

 चुप्पी के भी अर्थ बड़े हैं 

यूँ ही ताले नहीं जड़े हैं


संविधान को घोट रखा है 

लोकतंत्र की राह अड़े हैं


बच्चों को पुचकारी देकर 

डंडा-लाठी लिए खड़े हैं।


पेपर लीक तमाशा लगता 

रोजगार ख़ुद लिए पड़े हैं


आँसू सूख चुके हैं उनके 

अब तो केवल काँट गड़े हैं।


दुनिया उलट-पुलट हो जाए 

कुर्सी र ज़ुबाँ जकड़े हैं


मौन तभी टूटेगा अब तो 

राम कहेंप्रभु आप बड़े हैं


-संतोष त्रिवेदी