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7 सितंबर 2026

 घर में रहते घर ढहते, 

बाहर जाते पुल ढहते,

सड़कें धँसतीं, गड्ढे हँसते, 

वो केवल ‘फू-फा’ करते!


जान हमारी सबसे सस्ती, 

मौत की पूरी गारंटी,

अच्छे दिन फिर भी आए, 

दसों दिशाओं में कहते!


असमय जिसका लाल गया, 

माता विकल दुआर ताकती,

कब लौटेगा राजा बेटा, 

वो राहत का दम भरते!


लूट-खसोट औ कदाचार पर, 

बात अगर कोई करता,

नक्सल कहकर वो चिल्लाते, 

बिकी मीडिया संग बहते !


मंदिर लूट छला हिंदू को, 

ख़ुदा को भी बेदख़ल किया,

सब धर्मों को ख़ूब निचोड़ा, 

फिर ख़ुद को रक्षक कहते!


-संतोष त्रिवेदी