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2 सितंबर 2013

बाबा के रंग अनेक !

चौदह दिन बैकुंठ में,रहे अप्सरा संग।
बाबा पूर्ण पवित्र हो,नहीं शील हो भंग।।:)


चोला ओढ़े संत का, सीख जगत को देत।
पुड़िया बेचें धरम की,जनता बनी अचेत।
जनता बनी अचेत,हो रहे हैं सब अन्धे।
नेता, बाबा संग,चलातेअपने धन्धे।
ईश्वर भी हैरान,देख मन ही मन बोला।
मनुज नहीं ये निसिचर, धारे नकली चोला।।


मुझे सहानुभूति है उस नाबालिग से
जिसने हैवानियत की मिसाल कायम की,
मुझे दया आती है उस बाबा पर
जिसने संतई पर कालिख पोत दी,
मुझे सहानुभूति है हर उस मानव से
जिसने मानवता खोकर
व्यर्थ कर दिया अपना सृजन,
नष्ट कर दिया सृष्टि की अनुपम कृति,
और करा दिया अहसास अपने बीज का।
मुझे सहानुभूति है उसके निर्माता से,...
उसके पालकों और सेवकों से,
दुनिया के सबसे गरीब और असहाय
इस समय वे ही हैं।



4 जून 2011

लाल किले से बाबा लाइव !


भ्रष्टाचार के खिलाफ बिगुल बज चुका है,देशव्यापी अभियान चल रहा है,राम लीला मैदान  में देश के हर कोने से लोग इकठ्ठा हुए हैं,लगभग हर चैनल-वाला पूरी तरह से लहालोट है! इन सबका आखिरी निशाना लाल किला ही है ! लगता है देश में भ्रष्टाचार कहीं हैं भी ? इतने सारे लोग अगर इसके खिलाफ हैं तो हर कार्यालय,हर जगह ये कौन-से लोग हैं जो भ्रष्टाचारी हैं ?

सब अपने से बड़े भ्रष्टाचारी पर वार कर रहे हैं.न तो बाबा,न उनके चेले और न ही मीडिया इस मामले में पूरी तरह पाक-साफ है .मीडिया अपनी कमाई किस तरह से आज कर रहा  है,सबको पता है !आन्दोलन को कवर करने के लिए 'स्लॉट' बिक चुके हैं ,खूब स्पॉन्सर भी मिल गये हैं !

बहुत 'खुशी' का माहौल बनाया जा रहा है,ढोल-नगाड़े बजाकर इस आन्दोलन को 'अभिजात्य-टच ' दिया जा  रहा है .धरना-स्थल एक 'सेलेब्रिटी' बन गया है . यदि महात्मा गाँधी होते तो आज अपने इस हथियार पर उन्हें पुनर्विचार करने की ज़रूरत महसूस होती !

जिस प्रकार राम-मंदिर का मुद्दा ठीक था,पर उसके पीछे लोगों का उद्देश्य गलत, ठीक उसी प्रकार भ्रष्टाचार का मुद्दा ठीक है, पर इसके पीछे जुटे कुछ लोगों के उद्देश्य बिलकुल अलग हैं.लोगों के लिए केन्द्र का भ्रष्टाचार और कर्नाटक-जैसे राज्यों के भ्रष्टाचार अलग-अलग है !

स्वयं ईमानदार बनने से रोकने को किसने कहा है,पर इस बारे में उपदेश तो खूब मिल रहे हैं पर अमल करनेवाले बिरले ही हैं ! इसीलिए आज ईमानदारों  का टोटा है.जो एक-आध होते हैं उनको भी सरकारें सुरक्षा नहीं दे पातीं !आज जो सरकार के अंग नहीं हैं वे कल थे और कल होंगे पर उनकी प्राथमिकताएं बदल जाएँगी !

मेरी शुभकामनाएं  इस मुद्दे के साथ हैं ,पर यहाँ सारी कवायद काले-धन को सफ़ेद धन में बदलने की हो रही है !

14 मार्च 2010

बाबाओं के पीछे क्यों !

आजकल बाबाओं के चर्चे अखबारों ,चैनलों और आम आदमी की ज़ुबान पर खूब हो रहे हैं। मैं यह पूछना चाहता हूँ कि बाबाओं ने ऐसा कौन सा अपराध कर दिया है जिसके लिए लोग उनके पीछे लट्ठ ले के पड़े हैं।
भई,आज के बाबा हमारे ही समाज के अंग हैं,इसी से निकले हैं और अगर इसी में रम रहे हैं तो क्या बुरा है ?जिस समाज में जो रहता है तो उसको वैसा ही रहना पड़ता है नहीं तो वह इससे अलग-थलग नहीं पड़ जायेगा !जिस तेजी से हम सब आधुनिकता की दौड़ में भाग रहे हैं ,उसमें हमें कुछ भी साधन अपना लेना बुरा नहीं लगता है। आज नैतिकता और चरित्र की बातें करने और सुनने वाले दोनों भूखे मरेंगे,तो क्योंकर कोई ऐसा 'बेहूदा 'और लम्बा रास्ता अपनाये ?पैसे बनाने के खेल में जब समाज का हर तबका(नौकरीपेशा,राजनेता,चौथा स्तम्भ ,पुलिस,कार्यपालिका,न्यायपालिका,साहित्यकार,कलाकार)लगा हो तो केवल बाबाओं से उच्च नैतिक व सतयुगी मानदंडों की अपेक्षा करना क्या न्यायसंगत है ?

मुझे अपने बचपन की याद आती है,जब हमारे गाँव में वर्ष में एक-दो बार साधुओं का आगमन होता था। कई बार तो वे मेरे यहाँ भी आकर व्यक्तिगत ढंग से ठहरते थे या कुछ अन्य लोगों के यहाँ। मेरी भागीदारी समान रूप से हर जगह होती थी क्योंकि मुझे ,पता नहीं किन कारणों से सत्संग प्रिय था। शाम को कई बार साधुओं द्वारा कीर्तन-प्रवचन होता था जिसमें भारी संख्या में लोग शामिल होते थे। तब उनके लिए खान-पान की यथा-संभव व्यवस्था होती थी तथा विदाई के वक़्त मामूली-सी दक्षिणा।

अब आज के बाबाओं की कार्यशैली देखो तो पांच-सितारा सुविधाएँ भी फीकी लगेंगी। कहीं भी प्रवचन या सत्संग का कार्यक्रम हो तो बाबा के चेले पूरा ठेका लेके आयेंगे और यदि लेन-देन में कमी-बेसी हो जाए तो खूँटा गाड़ने से पहले ही वे अपना तम्बू उखाड़ लेंगे !वहाँ जाना भी आम आदमी के वश में नहीं होता । उनके प्रवचन की शुरूआती 'दक्षिणा' ही ५०० रुपये से शुरू होती है।

अब ऐसे कर्म-धर्म वाले बाबाओं से क्या उम्मीद रखी जाये? वे तो ईश्वर के बजाय अपने चित्रों,पत्रिकाओं का प्रचार-प्रसार करने में ही लगे रहते हैं इससे नाम और दाम दोनों मिल जाते हैं। इसलिए उन पर प्रहार करने वाले इसके स्रोत को भी देखें यदि वे इस बीमारी से मुक्त हों !