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23 दिसंबर 2013

सर्दी के रंग

१)
सर्द सुबह
मफलर बाँधे हुए,
शहर की सुनसान सड़क पर
कोहरे के साथ
आँखमिचोली करना
कभी कभी अच्छा लगता है।


२)
सर्दी की शाम
छप्पर के नीचे
अलाव तापते हुए
आलू भूनता हूँ,
कभी कभी बुढ़ापे में
अपने मन की सुनता हूँ।


३)
पीठ पर भारी बस्ता लादे
सुबह-सुबह निकलते हैं बच्चे,
कोहरे को चीरते हुए
नन्हें नन्हें पाँव बढ़ाते हैं,
हाथ की लकीरें मिटाते हैं !


 

13 मई 2013

क्षणिकाएं !

(१) सुख और दुःख

ऐसा वक्त कब आएगा
जब हम खुशी में
बचे रहेंगे सरल
और दर्द में अविकल
न खुशी में चहकेंगे और 
न ही दुःख में होंगे विह्वल
क्या हमारे जीते जी
ऐसा वक्त आएगा
जब हम चीजों को
एक नज़र से देखने लगेंगे ?
                                                        
 (२ )  कवि बनना स्थगित कर दिया है

दर्द को कितना बताएँ

हर तरफ मौजूद है.

समय नहीं मेरे पास

कि इस पर महाकाव्य लिखूं !

तुम मेरे खुशी के गीतों में ही दर्द बांच लेना,

अपने दर्द को मेरी खुशी में तिरोहित कर देना,

ऐसे ही जब तुम खुशी के नगमे गाओगे,

मैं तुम्हारा दर्द जान जाऊँगा !

फ़िलहाल,मैंने कवि बनना स्थगित कर दिया है !
 
(३) मदर्स डे
माँ की पहचान
अब फेसबुक कराएगा,
बाज़ार बड़ी ज़ोर से
माँ-माँ चिल्लाएगा ,
मगर वह भाव
कहाँ से लाएगा ?
सोचा न था,
एक दिन
माँ-बाप का रिश्ता
यूँ खुलेआम नुमाइश पे आएगा !!
 

15 जनवरी 2012

चुनावी क्षणिकाएं !

( कांग्रेस  )

राहुल जी को जल्दी है,
खतम  करनी है रेस,
सीटी बजने से पहले ही
दौड़ गई कांग्रेस !!

( भाजपा )

आओ-आओ
जो भी आओ,
अगड़ा-पिछड़ा ,तगड़ा आओ,
भाई-बिरादर टिकट कटाओ ,
जीत न पाओ,फिर सो जाओ !!

( सपा )

अबकी घूम रहे अखिलेश,
हवा भर रहे नेताजी.
जैसे-तैसे सत्ता पायें,
फिर से हों  गुंडे राजी !!

( बसपा )

माया अपना जन्मदिन मनाएं,
हम सब देते ढेर  दुआएं,
खूब कमाएँ,
यदि लौट के आयें !!

1 जनवरी 2012

गया साल ,नया साल

१) 

न गए का ग़म 
न आने वाले का ख़ैर-मक़दम

 २)

नए साल में 
नई खाल में 
जुज्झि करेंगे लोकपाल में 
आरक्षण में ,संघवाद में,
संसद में सब नाच करेंगे 
फिर से अपनी सुर-ओ-ताल में 

३)

गए और नए 
दोनों का आभार है,
गए ने जहाँ 
कई नए मिलाए ,
नाकुछ रहे जो 
वो अलगाए !
नए में सब पुराने रहेंगे,
चाहे नए जितने बनेंगे !
पुरनिया तो थाती हैं,पक्के संघाती हैं !


अब देखिये अपने अली साहब की दुआएं !
(३१/१२/२०११ को आखिरी आती हुई मेल में )


ना तो आज जिंदगी का कोई  आख़िरी  दिन है,
और ना ही कल पहला होने वाला है .
...बस दुआओं के ख्याल से 
कुछ लम्हें फिक्स कर रक्खे हैं !
सो दुआ ये कि
आप खुशहाल-ओ-आबाद रहें 
लम्हें आपके इशारे पर थिरकते रहें 
और वक्त आपकी मुट्ठी में क़ैद रहे !!

9 दिसंबर 2011

चार क्षणिकाएँ !

(१ )

भ्रष्टाचार 
मुँह बाए खड़ा है,
हमारी उखड़ती  साँसों को गिनता,
जान के पीछे पड़ा है,
सब्र के आगे अड़ा है !!
साभार:गूगल बाबा 


(२)


नेता 
अब ऐसा विषय है,
सोचने में भी प्रलय है,
कह दिया कुछ जो इन्हें ,
सुकून का अंतिम  समय है,
हर तरफ पहरे हमारे 
और पहरों में भी भय है !!


(३ )


राजनीति
सबकी चहेती,
सबको इसी से प्यार है,
जो गुलाटी मार ले,
वह बची सरकार है !
देश है अब 'सेल ' पर ,
इससे न  सरोकार है ,
व्यापारी को दरकार है,
उसी की पैरोकार है !




(४ )

एक बूढ़े से
क्रांति की उम्मीद में हम
लगातार उसको ताक रहे हैं,
अँधेरी कोठरी में चंद जुगनू लिए 
हम झांक रहे हैं .
रोशनी जब चीरकर घुस आएगी ,
इस अँधेरे की तभी,
सचमुच में शामत आएगी !!






4 मार्च 2009

मेरे पास उनका साथ है...

चुनाव आए हैं,
दलों ने अपने-अपने राग बनाए हैं.
फ़साना वही है,भले ही धुन नयी हो,
बहिनजी ने इस बीच कमाल किया है,
उत्तर प्रदेश को नया रूप दिया है।
हर बाहुबली और गुण्डे को
बसपा में शामिल किया है,
कुछ और नहीं उन्हें केवल सुधरने का मौका दिया है!
इसके अलावा प्रचार-अभियान भी बदला है,
'तिलक,तराजू,तलवार.....'को त्यागकर
नयी धुन में दिल मचला है।
अख़बार में पूरे पन्नों के विज्ञापन तो आ ही रहे हैं
टी वी में भी अच्छी धुन बज रही है ।
'मेरे पास उनका साथ है...'
यह उनके 'नए ' साथी कह रहे हैं या
बेचारी जनता कह रही है!

15 अगस्त 2008