भले सूरत बदल जाए ,
सूरज पश्चिम से उग आए,
मन की कुटिलता न बदले
लोमड़ी भी सिहर जाए !
जल जायेंगे चेहरे सभी
जो भूल से पहुँचे वहाँ !
जन्म उनका है निरर्थक
अभिशाप है यह भी हमारा,
जला कर ख़ाक कर देगा उन्हें,
दहकता डाह का अंगारा !
तरस आता है हमें
हालत ये उनकी देखकर ,
सूरज पश्चिम से उग आए,
मन की कुटिलता न बदले
लोमड़ी भी सिहर जाए !
कोयले की आग दहके,
शीतल-छाँव मत ढूँढो यहाँ,जल जायेंगे चेहरे सभी
जो भूल से पहुँचे वहाँ !
जन्म उनका है निरर्थक
अभिशाप है यह भी हमारा,
जला कर ख़ाक कर देगा उन्हें,
दहकता डाह का अंगारा !
तरस आता है हमें
हालत ये उनकी देखकर ,
टंकी चढ़ें,लोमड़ बनें
उसूल अपने बेचकर !
लोमड़ी के दिवस पूरे
अपने भी बेगाने हुए,
रात उनके साथ है
दिवस खिसियाने हुए !