पृष्ठ
प्रिंट मीडिया में बैसवारी
बेटे की तूलिका
टेढ़ी उँगली
रचना
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
रचना
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
26 सितंबर 2012
रचना जब विध्वंसक हो !
जब चुप्पी इतनी क़ातिल है,
लब खोलेंगे तब क्या होगा ?
जब छूछे नैन बरसते हैं,
भर आएँगे तब क्या होगा ?
अल-सुबह से छाई वीरानी,
शब आ जाने पर क्या होगा ?
बंजर धरती दहके हरदम,
बादल बरसेंगे,क्या होगा ?
रचना जब विध्वंसक हो,
साहित्य-सृजन तब क्या होगा ?
लिए आइना फिरते हरदम,
खुद झांकेंगे तब क्या होगा ?
पुराने पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
संदेश (Atom)