महलों की फुलझड़ी से ,वो पाए उजियार ।१।
दीवाली रोशन करे,उम्मीदों के दीप।
सुखिया मोती ढूँढता,खाली मिलता सीप ।२।
सजनी बाती बाल के,जले नेह के संग ।
जाने कब वो आएँगे,सुलग रहे सब अंग ।३।
पाहुन हैं परदेस में,सौतन लक्ष्मी साथ ।
घर की लक्ष्मी थापती,दरवाजे पर हाथ ।४।
दीये की लौ दे रही,अलग-अलग सन्देश ।
सुखिया दुःख में ही रहे,हो अमीर का देश ।५।
दीवाली है किशन की,खड़ा सुदामा दूर ।
चकाचौंध में देखता, महल,झोपड़ी, घूर ।६ ।
