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13 नवंबर 2012

इनकी दीवाली,उनकी दीवाली !

 
 
दिया जले बाज़ार में,हरिया घर अंधियार
महलों की फुलझड़ी से ,वो पाए उजियार  । 

दीवाली रोशन करे,उम्मीदों के दीप। 
सुखिया मोती ढूँढता,खाली मिलता सीप

सजनी बाती बाल के,जले नेह के संग
जाने कब वो आएँगे,सुलग रहे सब अंग ।३।   

पाहुन हैं परदेस में,सौतन लक्ष्मी साथ । 
घर की लक्ष्मी थापती,दरवाजे पर हाथ  ।४

दीये की लौ दे रही,अलग-अलग सन्देश । 
सुखिया दुःख में ही रहे,हो अमीर का देश ।५

दीवाली है किशन की,खड़ा सुदामा दूर ।
चकाचौंध में देखता, महल,झोपड़ी, घूर ।६ ।