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24 नवंबर 2013

बहुत कठिन समय है साहब !

बहुत कठिन समय है साहब,

पता नहीं कब,कौन पत्रकार तरुण
और ईमानदार केजरीवाल हो जाए,

सब कुछ दांव पर है,
पता नहीं कब कोई संत आसाराम
और राजनीति साहब हो जाए !

बहुत कठिन समय है साहब,
पता नहीं
कब कोई सामाजिक योद्धा
कार्पोरेट पत्रिका का संपादक
और कोई न्यायाधीश मुजरिम बन जाए !! 

बहुत कठिन समय है साहब ,
पता नहीं कब पहरेदार लुटेरा
और चोर चौकीदार हो जाए !!

22 सितंबर 2011

हमने तो बस गरल पिया है !

तुमने जो संताप दिए हैं,
हमने तो चुपचाप सहे हैं,
जब हमने पत्थर खाए हैं,
तुमने केवल रास किया है,
हमने तो बस गरल पिया है  !१!


मुझे नहीं दुःख ,नहीं मिले तुम,
आत्मा के भी होंठ सिले तुम,
मौन तुम्हारा तुम्हें डसेगा,
तुमने केवल हास किया है,
हमने तो बस गरल पिया है !२!


मैं तो वैसे भी जी लूँगा,
अमिय समझकर विष पी लूँगा,
तुमने जो विष-बेल उगाई,
जग को भी संत्रास दिया है,
हमने तो बस गरल पिया है  !३!


मैं दीप जलाता फिरता हूँ,
दुःख नहीं कि मैं भी जलता हूँ,
देखो,समय बनेगा  साक्षी,
तुमने  कलुषित  इतिहास  किया है,
हमने तो बस गरल पिया है  !४!


हमको  गैरों से आस न थी,
तुमसे भी कोई फांस न थी, 
पर स्वांग देखने के आदी तुम,
कैसा  ये खेल ? निराश किया है  !
हमने तो बस गरल पिया है  !५!


तुमने  झील के उथलेपन में 
ही अपने को डुबो दिया,
यह अथाह  जलराशि छोड़कर 
अपने सुख का ह्रास किया है,
हमने तो बस गरल पिया है  !६ !