कल का दिन हमारी ज़िन्दगी का एक यादगार दिन रहा.परसों अविनाश वाचस्पति जी का फ़ोन आया कि रविवार को 'एनडीटीवी' के 'हम लोग' कार्यक्रम के लिए निमंत्रण आया है,चलना है तो बताओ.मैंने सहर्ष स्वीकृति दे दी और साथ ही मित्र शाहनवाज़ सिद्दीकी और सानंद रावत जी से चलने के लिए कहा तो वे लोग भी तैयार हो गए.कल करीब ग्यारह बजे हम स्टूडियो पहुँच गए.सभी को केवल मुनव्वर राना से मिलने की बेताबी थी.मेरे लिए अतिरिक्त खुशी थी कि वे मेरे गृह जनपद के ही हैं ! दुर्भाग्यवश अस्वस्थता के चलते अविनाशजी तो नहीं आ पाए पर हम तीनों लोग वहाँ डट गए.
रवीश कुमार जी कार्यक्रम की शुरुआत करें ,इससे पहले ही मुनव्वर जी ने अपने अंदाज़ में चुटकियाँ लेनी शुरू कर दी थीं.पैर में दिक्कत की वज़ह से चार महीने से वे अस्पताल में थे,पर अपनी इस तकलीफ को उन्होंने बड़ी सहजता से लिया.कार्यक्रम शुरू होने पर पहले आध घंटे उन्होंने तरह-तरह के किस्से सुनाये और माँ ,सियासत.मोहब्बत आदि पर शेरो-शायरी सुनाई ! इस कार्यक्रम को विस्तार से यहाँ सुन सकते हैं !
कार्यक्रम के दौरान हमें भी एक सवाल पूछने का मौका मिला,जिसमें मैंने पूछा कि आपको सियासत व सरोकार में सबसे अधिक दिल किस पर शायरी करने का होता है तो उन्होंने बेलौस होकर कहा कि हम शायरी तभी करते हैं जब दिल कहता है | इस तरह कार्यक्रम की समाप्ति के बाद उनसे मिलने के लिए लोग टूट पड़े.हमने उनसे चरण छूकर आशीर्वाद लिया .सबने फोटो भी खिंचवाई. इसके बाद हम सब अविनाशजी के यहाँ उनके हाल लेने गए और शाम को पहली बार अपने को टीवी पर चमकते हुए देखा !
अब देखिये कई दृश्य :
रवीश कुमार कार्यक्रम संचालित करते हुए

मुनव्वर जी माँ को याद करते हुए

दर्शकों के बीच हम

शाहनवाज़ और सानन्दजी के साथ

ज़बरिया हम उनके साथ बैठ ही गए !
रवीश कुमार जी कार्यक्रम की शुरुआत करें ,इससे पहले ही मुनव्वर जी ने अपने अंदाज़ में चुटकियाँ लेनी शुरू कर दी थीं.पैर में दिक्कत की वज़ह से चार महीने से वे अस्पताल में थे,पर अपनी इस तकलीफ को उन्होंने बड़ी सहजता से लिया.कार्यक्रम शुरू होने पर पहले आध घंटे उन्होंने तरह-तरह के किस्से सुनाये और माँ ,सियासत.मोहब्बत आदि पर शेरो-शायरी सुनाई ! इस कार्यक्रम को विस्तार से यहाँ सुन सकते हैं !
कार्यक्रम के दौरान हमें भी एक सवाल पूछने का मौका मिला,जिसमें मैंने पूछा कि आपको सियासत व सरोकार में सबसे अधिक दिल किस पर शायरी करने का होता है तो उन्होंने बेलौस होकर कहा कि हम शायरी तभी करते हैं जब दिल कहता है | इस तरह कार्यक्रम की समाप्ति के बाद उनसे मिलने के लिए लोग टूट पड़े.हमने उनसे चरण छूकर आशीर्वाद लिया .सबने फोटो भी खिंचवाई. इसके बाद हम सब अविनाशजी के यहाँ उनके हाल लेने गए और शाम को पहली बार अपने को टीवी पर चमकते हुए देखा !
अब देखिये कई दृश्य :
रवीश कुमार कार्यक्रम संचालित करते हुए

मुनव्वर जी माँ को याद करते हुए

दर्शकों के बीच हम

शाहनवाज़ और सानन्दजी के साथ

ज़बरिया हम उनके साथ बैठ ही गए !
