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19 अप्रैल 2014

झूठे वादों का मौसम है।

झूठे वादों का मौसम है,
तगड़ी घातों का मौसम है।

बीत गए वो सोने के दिन, 
काली रातों का मौसम है। 

पनघट पर खाली सन्नाटा,
उसकी यादों का मौसम है। 

और नहीं कुछ सूझे मन को, 
केवल बातों का मौसम है। 

आँखों में है एक समंदर, 
अब बरसातों का मौसम है।

26 जनवरी 2014

आम आदमी

आदमी ने साँप को,अब डस लिया है,
हाथ से अपने, उसी ने, विष पिया है। 
राजपथ को झाँकता था,दूर से जो,
आज उसके द्वार पर,पग धर दिया है। 
लाठियाँ चारों तरफ़ से, उठ गईं, 
मूर्ख है, उसने सभी का हक लिया है। 
बात डरने और मरने की नहीं अब,
इतने सालों से कहाँ भी वह जिया है ? 

26 अप्रैल 2013

बदलता मौसम !



दिल्ली का मौसम बदला है।
आदम से शैतान भला है।।
 

तुमने अपना तीर चलाया।
अब तक कितनी बार छला है।
 


खुले-आम घूमते शिकारी।
अपनों से हारी अबला है।।
 


ये मौसम भी बदलेगा ।
घटा घिरी है,पवन चला है।।


 
जाने सब कुछ,फ़िर भी नादाँ
कच्ची उमर ,जुर्म पहला है ।।

 
हम कुछ समझ नहीं पाते
नए ज़माने का मसला है ।।

 
तू उसकी बातों पर मत जा
मछरी ताके ,वो बगुला है ।।

 
छोर आसमां का छू लेंगे
उड़ने को अब दिल मचला है ।।

 
धीरे-धीरे तिमिर छटेगा

कल का दिवस सुनहला है ।।

 




22 फ़रवरी 2013

गज़ल

न चराग रहे घर में,
न सुकूँ बचा शहर में !

मोहब्बत आई, गई हुई
नफ़रत रुके जिगर में !

हमने करी वफ़ा पर
आए नहीं नज़र में !

अपना मक़ाम तय है
अब भी हैं वे सफ़र में !

ज़िंदगी देती नहीं कुछ
सीख देती है डगर में !

हम दर्द को लेते छुपा,
जी रहे सबके ज़हर में ! 



 

16 जनवरी 2013

तुम और हम !

तुमसे जितनी बार मिला हूँ,
नए रूप से यार, हिला हूँ !(१)

भरे सरोवर मुरझाया-सा ,
छोटे नद औ नार खिला हूँ !(२)
 

बीच समंदर डूबा-उतरा ,
लिए नाव-पतवार मिला हूँ !(३)

गम के घूँट न लगते कड़वे,
चोटों को हर बार सिला हूँ !(४)

तेरे सभी पैंतरे अच्छे,
नहीं हुआ हुशियार,भला हूँ ! (५)
 

23 दिसंबर 2012

चलो दिल्ली !


 
 
चलो दिल्ली ,चलो जनपथ, जहाँ हुक्काम बहरे हैं
हवाओं में,फिजाओं में ,जहाँ संगीन पहरे हैं.
चलाओ गोलियाँ ! छलनी हमारी छातियाँ हो जांय ,
ये आतिश बुझ नहीं सकती, हमारे ज़ख्म गहरे हैं.

तुम्हारे चैन की अब, आखिरी शब आ गई  ,
हमारा आज बिगड़ा है ,मगर सपने सुनहरे हैं.

बढ़े क़दमों ! नहीं रुकना ,बदल जायेगा मौसम ये,
नया सूरज उघाड़ेगा ,अँधेरे में जो चेहरे हैं.