12 जनवरी 2012

चुनावी-दोहे !

साभार:गूगल बाबा 
दिन में सपने देखते ,अब गाँवों  के लोग !
नेता रोटी खायेंगे,छोड़ के छप्पन-भोग !!

बुत में परदा डालते,बनते हैं नादान !
सारे अच्छे काम हैं,घूँघट में आसान !!

सबने हाँका दे दिया,चलो गाँव की ओर !
वोट मिलेगी जाति की ,चूसेंगे हर पोर !!

बोरे भर वादे लिए,थैली भर संकल्प !
फिर से छलने आ गए,रहा न पास विकल्प !!



53 टिप्‍पणियां:

  1. विकल्प तो महाराज ... तलाशना ही होगा ... चाहे जैसे भी हो ... जो भी हो ...

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    1. हमारे लिए छला-छली ,उनके लिए चला-चली !

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  3. आप इस विधा में भी पारंगत हैं, इस पोस्ट से प्रमानित होता है।
    जनसत्ता में छपने के लिए बधाई।

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  4. Sankalp me vikalp ka hota nahin hai prakalp
    Sankalp voter ko lootne ka, kaise bane vikalp ?

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    1. इसीलिए उनके पास संकल्प कम हैं,जैसे हमारे पास विकल्प !

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  5. नेता घर घर फिर रहा सबके लागूँ पाय
    सत्ता फिर से खेंच लूँ बचता यही उपाय

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    1. एकठो दोहा आपने,आखिर दिया बनाय !
      पढ़ लेगा सन्देश वो,तब भी रुका न जाय !

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  6. बस केवल छौंक बघार से ही कम नहीं चलेगा ..पूरा भोजन चाहिए!

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    1. हमरे पास तो नाश्ता है,पूरी प्लेट तो बहिन जी के पास है !

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  7. बुत में परदा डालते,बनते हैं नादान !
    सारे अच्छे काम हैं,घूँघट में आसान !!


    घूँघट में सारे अच्छे काम आसान हैं. वाह!

    मस्त मस्त दोहें हैं जी.

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    1. कोई देखे भी ना,
      वो अच्छे भी लगते रहें !

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  8. अद्भुत दोहे आपके, राजनीति के रंग,
    नेताओं के आपने खूब बताए ढंग!
    गिद्ध खात मृत जीव को, जीवित को नहीं खात,
    नेता हमरे खाए लें, पैसा, मानुस जात!

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    1. जिंदा-मुर्दा खात सब,ई नेता की जात ,
      ताते नेता ना बने,खाली खाएं भात !

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    2. कलयुग के ये कालनेम है सब कुछ इनकी माया है
      राष्ट्रप्रगति का सारा धन, इनके पेट समाया है

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  9. बस यही देखने आये कि अभी तक अली सा'ब आये कि नहीं ?
    :)

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    1. आप गए कि वो आये,
      थैली भर बोरा लाये !

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    2. थैली थैला और झोले बोरे का नाम ना लो
      ई चुनावी दोहों को कोई और नाम ना दो!

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  10. बेहतर दिन और जीवन की आस सपनों में
    अर्थ की आस प्यास और खटास अपनों में

    जनविकास की नीतियां बुतों में अटक गईं
    चुनाव की प्याली में तूफ़ान सी खटक गईं

    यही वक़्त है सही वक़्त है गाँव जाकर लूट लो
    जय करो फिर वोट काटो और यहाँ से फूट लो

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    1. गर आपकी अंधी दया, यूँ ही बनी रहेगी,
      फसल उनकी औ हमारी ,चौगुनी बढती रहेगी !

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    2. ही ही ही हू हू हू हा हा हा हा आहा
      चुनाव के चक्कर में सब है स्वाहा!


      @अली सा'ब के समर्थन से :)

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  11. सच है प्रवीण भाई ....
    किंकर्तव्य विमूढ़ से बैठे हैं ..क्या करें इस बार !

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    1. हाँ सतीश भाई,पर मैं प्रवीण नहीं हूँ !

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    2. भूल सुधार :
      कृपया मेरी टिप्पणी में प्रवीण की जगह संतोष पढ़ा जाए ..
      संतोष भाई , लगता है उम्र हो गयी है सो आप दोस्तों को झेलना ही है :-)

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    3. सठिया तो हम गए हैं गुरु.....:-)

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  12. खूब-सूरत प्रस्तुति |
    बहुत-बहुत बधाई ||

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  13. कटाक्ष है जनाब.. बेहतरीन.. इस चुनावी सरगर्मी में..

    प्यार में फर्क पर अपने विचार ज़रूर दें...

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  14. बोरे भर वादे लिए,थैली भर संकल्प !
    फिर से छलने आ गए,रहा न पास विकल्प !!

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  15. बहुत अच्छे और मारू दोहे :)

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  16. सारे अच्‍छे काम घूंघट में वाह..

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    1. बाहर वालों की निकले आह ;-)

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    2. खुराफातियों के लिए एक राह :)

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    3. हमारी तो बस एक ही चाह
      रचना पढकर बोले,वाह,वाह,....


      welcome to new post--काव्यान्जलि : हमदर्द.....

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  17. चुनावी दोहे भी अब संगीन आ रहे हैं
    टीप सादे हैं, उत्तर रंगीन आ रहे हैं!

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    1. आप आये,बहार आई!
      पोस्ट की अब हुई कमाई !!

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    2. हमारा भी तो हिस्सा बनता है भाई,...

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  18. दोहों में ही सही, राजनीतिज्ञों की अच्‍छी खबर ली है।

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    1. उनकी क्या खबर हम लें,
      जो औरों की रखते हैं !

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  19. चिकोटी काटते दोहे. लेकिन उनकी खाल बहुत मोटी है.

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    1. कोई नहीं,पत्रकार लोग तो महीन कर देते हैं !

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