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1 फ़रवरी 2014

बासंती-उन्माद !

प्यारा माह बसंत यह,फैलाता उन्माद ,
सखी झरोखे बैठ के,तड़पे प्रियतम याद,
तड़पे प्रियतम याद,नहीं आये हैं साजन,
रस्ता रही निहार,काटता है घर-आँगन,
झड़ते पत्ते-फूल,बह रही अँसुवन धारा ,
दिल में गड़ते शूल,कहाँ है उसका प्यारा ?

14 फ़रवरी 2013

यूँ दबे पाँव आया वसंत !



यूँ दबे पाँव आया वसंत !
हरियाली की चादर ओढ़े
धूप गुनगुनी साथ लिए,
मंद पवन से द्वार बुहारे
पुलकित मन ,श्रृंगार किये ,

पट खोल दिए दोनों तुरंत !
यूँ दबे पाँव आया वसंत !!

नयनों से धार बही झर-झर
काजल बह गया अश्रु बनकर ,
सामने दिखे मेरे प्रियतम
बरबस लिया उन्हें अंक भर ,

मिल रहे प्रिया से आज कन्त !
यूँ दबे पाँव आया वसंत !!

 

13 फ़रवरी 2012

उनका है हर दिन बसंती !

आज से पहले न था
दिल में ,नहीं बाज़ार में ,
बौरा गया हर आदमी
अब अचानक प्यार में !!(१)
साभार: वेलेंटाइन डे

साल भर तकते रहे
हम निगाहे-यार में ,
एक भी कोना न पाए
उनके प्रेमागार में !!(२)

आज के दिन देख लें
हुस्न की तलवार में
धार कितनी है बची,
जाती हुई बहार में !!(३)

फूल कुछ मुरझा गए हैं
इंतज़ार-ए-यार में ,
एक दिन का प्रेम-उत्सव,
लुट गया व्यापार में !!(४)

उनका है हर दिन बसंती
हमें 'राशनिंग ' प्यार में ,
अच्छा है दिन एक बीते
बरस नहीं,मनुहार में !!(५)