होरी कै सबका मुबारकबाद !होरी तो हर साल की तरा आई है,मुदा अबकी हम स्वाचा कि होरी अपने कम्पूटर बाबा के साथै मनाइ । एकु दिन पहिलेहेते हम फेसबुक,ट्विटर और ब्लागवा मा धंसि
गैन। जहाँ-तहां हम भकुअन कि तरा घूमित रहेन मुदा हमका कउनो रसिया न मिली जहिते हम फागुन की आंड़ मा आपन काम बना लेई ! सही बताइ,यहि कम्पूटरी दुनिया मा हम एकदम बौझक हन ।
अपने बचपन मा ,जब हम गाँव मा रहित रहेन तब सही मा, बड़ी मजा आवति रहै। धुलेंडी के दिन आपनि बानर -सेना तय्यार कइके खूब हंगामा मचाइत रहेन। बादि मा जब घर-घर फागु जाति रहै तो वहिमा बड़ा आनंद आवत रहै। कतो गुर-भंगा मिलै तो कतो कुसुली (गुझिया) ,कतो-कतो ऊंख का रसु औ पानौ मिलत रहैं.फाग गावै मा बड़ी मजा आवति रहै। जब फागु ना आवै तो सबके सुर मा सुर मिला के यह बताइत रहेन कि हमहुक आवथि ।
जब ते हम लिखि -पढ़ि के तय्यार भैन तो लागत कि सबते बड़े भकुआ हम ही हन ।अब ना तो वी मनई रहे,ना भौजाई और ना वी तेउहार । बस बचे हैं तो हमारि जइसि कुछु भकुआ जिनके लगे कउनो काम नहिन सिवाय कम्पूटर बाबा मा भड़ास निकारै के !
बुरा न मानो होरी हैं.....
गैन। जहाँ-तहां हम भकुअन कि तरा घूमित रहेन मुदा हमका कउनो रसिया न मिली जहिते हम फागुन की आंड़ मा आपन काम बना लेई ! सही बताइ,यहि कम्पूटरी दुनिया मा हम एकदम बौझक हन ।अपने बचपन मा ,जब हम गाँव मा रहित रहेन तब सही मा, बड़ी मजा आवति रहै। धुलेंडी के दिन आपनि बानर -सेना तय्यार कइके खूब हंगामा मचाइत रहेन। बादि मा जब घर-घर फागु जाति रहै तो वहिमा बड़ा आनंद आवत रहै। कतो गुर-भंगा मिलै तो कतो कुसुली (गुझिया) ,कतो-कतो ऊंख का रसु औ पानौ मिलत रहैं.फाग गावै मा बड़ी मजा आवति रहै। जब फागु ना आवै तो सबके सुर मा सुर मिला के यह बताइत रहेन कि हमहुक आवथि ।
जब ते हम लिखि -पढ़ि के तय्यार भैन तो लागत कि सबते बड़े भकुआ हम ही हन ।अब ना तो वी मनई रहे,ना भौजाई और ना वी तेउहार । बस बचे हैं तो हमारि जइसि कुछु भकुआ जिनके लगे कउनो काम नहिन सिवाय कम्पूटर बाबा मा भड़ास निकारै के !
बुरा न मानो होरी हैं.....

