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9 अप्रैल 2013

नारी कोई सामूहिक ब्लॉग भी है ??

परिकल्पना-पुरस्कारों के बाद अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इस समय डायचे-वेले ने श्रेष्ठ ब्लॉगर नामित करने का अभियान चलाया हुआ है.जिन मुद्दों को लेकर परिकल्पना की आलोचना की गई थी,वे इसमें भी मौजूद हैं.
सबसे ज़्यादा आपत्तिजनक बात 'नारी'  ब्लॉग के नामांकन को लेकर है.इसे सामूहिक ब्लॉग की श्रेणी में रखा गया है जबकि शुरूआती दिनों के बाद ही इसमें से कई नारी ब्लॉगर को हटाया गया,बाद में अकेले ही लिखा जाने लगा और यहाँ तक कि पढ़ना भी आमंत्रित और आरक्षित कर दिया गया.क्या किसी ब्लॉग की यह पहचान हो सकती है,जबकि वह सामूहिक भी हो ?
अगर कंटेंट के नाम पर भी देखा जाय तो यहाँ सिफर रहता है. जानकीपुल या मोहल्ला लाइव जैसों के मुकाबले रवीश कुमार ने इसे नामांकित करके निराश किया है !


ब्लॉग की मुख्य अवधारणा ही पारस्परिक मंतव्यों का आदान -प्रदान होता है जबकि 'नारी' ने कई बार इसका उल्लंघन किया है,अपने व्यक्तिगत नियम बनाये हैं,जबकि इसे सामूहिक ब्लॉग बताया जा रहा है .जहाँ पढ़ने के लिए गंभीर सामग्री न हो,दूसरे ब्लोग्स के बारे में हमेशा नकारात्मकता हो,पढ़ने तक में आरक्षण हो,ऐसे में किन आधारों पर उसे वोट दिया जाए ??
 

27 नवंबर 2011

ब्लॉगिंग के साइड-इफेक्ट !

इधर लिखते हुए इतना समय तो हो ही चुका है कि ब्लॉगिंग के बारे में अपने उच्च विचारों से  भाइयों  का ज्ञानवर्धन कर सकूँ ! सबसे ज्यादा बात जो मुझे महसूस हुई वह यह कि यहाँ पर लिखने से ज़्यादा टीपने को लेकर  बड़ी संवेदनशीलता है.इसके लिए इतनी मारामारी  है कि बक़ायदा कई मठ स्थापित हो चुके हैं. आप यदि नए-नए ब्लॉगर हैं तो आपको इन्हीं में से किसी एक में घुसना होगा.अब यह आपकी योग्यता और क़िस्मत पर निर्भर है कि वह मठ आपकी प्रतिभा को जल्द परख ले. आपका लिखते रहना से ज़्यादा ज़रूरी है ,टिपियाते रहना.आप बड़ी संख्या में टीपें पा रहें हैं तो ज़रा कुछ दिन 'आउट -स्टेशन' होकर देखिये या विश्राम करने की ज़ुर्रत करिए,सारा दंभ हवा हो जायेगा ! दो-चार रहमदिल दोस्त ही नज़र आयेंगे,आपकी पोस्ट टीपों के नाम पर पानी माँगेगी ! हाँ,पोस्ट लिखने के बाद यदि गणेश-परिक्रमा-स्टाइल में सौ पोस्टों पर भ्रमण कर आयेंगे तो निश्चित ही आपको साठ-सत्तर 'सुन्दर-भाव',चिंतनपरक आलेख' और 'प्रभावी-प्रस्तुति' के रूप में ज़वाबी-प्रसाद मिल जायेगा.आपको भी ख़ुशी होगी कि कोई नया  ब्लॉगर (सयाना नहीं) यही समझेगा कि वाकई इस बन्दे में दम है !


टीपें पाने के उद्यम भी अजब-गज़ब हैं.सबसे सीधे लोग तो पोस्ट लिखकर कई जगह एक-एक लाइन लिखकर आ जाते हैं,ज़्यादा हुआ तो पोस्ट-लेखक कुछ लाइनें (जो उसे खुद समझ नहीं आतीं) कोट करके 'क्या खूब ' या 'सुन्दर प्रस्तुति' चेंपकर पोस्ट-लेखक को कृतार्थ  कर देंगे !इस कोटि से थोड़ा सयाने वे होते हैं जो  सम्बंधित पोस्ट पर सुन्दरता की  डिफॉल्ट-टीप  लगाकर अपनी नई पोस्ट की करबद्ध सूचना देंगे !अब वह यही समझे बैठे  हैं  कि वह यदि खुले-आम  ऐसी अभ्यर्थना नहीं करेंगे  तो ये महोदय आयेंगे ही नहीं.तीसरी कोटि के लोग वे हैं ,जो सयाने होने के साथ कुछ काइयाँपन भी लिंक के रूप में बिखेर देते हैं.वे यह समझते हैं कि जहाँ टीप रहे हैं,वहाँ का पोस्ट-लेखक गूगल-सर्च के द्वारा भी उस तक नहीं पहुँच पायेगा !


इस तरह टीपें हासिल करने की ये सीधी-सादी युक्तियाँ रहीं.कई बार तो लोगों को मेल कर,फोन कर(हाल-चाल के बहाने ,इसमें हाल कम चाल ज्यादा? ) भी दोस्ती के हवाले भी टीपें हथियाई जाती हैं! पर कई टीपबाज इतने शातिर हैं कि इतना सब होने के बाद भी उनकी आमद उस बेचारे की पोस्ट पर नहीं होती.इधर जितनी कम टीपें पोस्ट में दिखती हैं उतनी ज़्यादा उसकी 'हार्ट-बीट' बढ़ती है !अगर कुछ टीपबाज़  इतने शातिर हैं तो टीप हथियाने वाले भी खूब शातिर और जागरूक हो गए हैं. ऐसे लोग दाढ़ी बनाने वाली पोस्टों से लेकर टंकी पर चढ़ने व ब्लॉग-जगत को 'अंतिम-प्रणाम ' कहने की नौटंकी में माहिर हो गए हैं !

कुछ ब्लॉगर ,जो अपने को लेखक कम सेलेब्रिटी अधिक समझ बैठे हैं,इतने गैरतमंद हो उठते हैं कि अपने से  कमतर किसी ब्लॉग पर जाने को वे अपना अपमान समझते हैं.कोई बार-बार भी उनके ब्लॉग पर जाकर गंभीर-टीप देता है तो भी वह उसको 'अगंभीर' ही समझते हैं,ज़्यादा हुआ तो एक-आध स्माइली ठोंक कर चले जायेंगे  ( शायद यह बताना कि इस 'कूड़े' पर ठीक से हँसा भी नहीं जाता) !वे इस बहाने जताते हैं कि वे केवल लिखने और पढ़वाने भर के लिए अवतरित हुए हैं,प्रेरणा देना या उपदेसना उनके लेखकीय-कर्म में शामिल नहीं है.भले ही वह कई 'कुपोस्टों' पर जाकर ,जल-जलाकर लौटे हों.कुछ ऐसे भी सयाने टीपबाज  हैं जो किसी पोस्ट को पढते हैं,घोखते हैं,मजे लेते हैं पर मुँह से बकुर नहीं फूटेगा  और कन्नी काटकर चुप से ,बिना टीपे ऐसे निकल जाते हैं कि कहीं उन्हें करंट न लग जाए या इससे उनकी टीआरपी न गिर जाए !


कुछ लोग तो इतने फ़ुरसत में होते हैं कि खुराफ़ात के लिए अपनी कलम और स्याही बचा के रखते हैं .जो उनके अपने मठ के चेले होते हैं उन्हें भी वे नहीं बख्शते  ! कभी किसी को अपना अलग मठ बनाते देखते हैं तो सन्निपात की अवस्था में हो जाते हैं,अपने सारे हथियार खूँटी में टाँग कर उस निरीह-ब्लॉगर  को अपने पैरों पर खड़ा होने की गज़ब-शक्ति देते हैं ! कुछ ब्लॉगर तो मौके की तलाश में रहते हैं,किसी ने भी कुछ उन्नीस-बीस लिखा तो बिना लाग-लपेट के, उसके आगे-पीछे का ,अपनी यथाबुद्धि द्वारा ,संदर्भ देकर ,विलोप हो जाते हैं.ऐसे और भी कई तरह के ब्लॉगर सक्रिय हैं जो तथाकथित रूप से निष्क्रिय है पर उनके अपने मठ की जब पोस्ट आती है तो अपनी कलम घसीट ही देते हैं.


इसके उलट कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनके यहाँ यदि गलती से भी आप कभी चले गए तो ज़बरिया आपको अपना लेंगे,न-न कहते-कहते अपने मठ की दीक्षा भी दे देंगे और बिला नांगा आपको पढ़ते रहेंगे,टीपते रहेंगे और आप इनसे कुछ सीखते भी रहेंगे.इनके पास पता नहीं कौन-सा गरम-मसाला  होता है कि एक ठंडी-सी पोस्ट में भी कमाल का उबाल ला देते हैं.टीपने वाले  बार-बार इनके और पोस्ट के संपर्क में रहते हैं.कुछ लोग तो इतने भोले हैं कि किसी घटना -दुर्घटना से इनका लेना-देना नहीं होता.ये शांतिप्रिय ढंग से यहाँ,वहाँ टीप देते हैं,टीप पाते है,बस...इत्ते से संतुष्ट हो जाते हैं !


ब्लॉगिंग-जगत में कई तरह की प्रवृत्तियां सक्रिय हैं.अब यह आप पर निर्भर है कि इन प्रवृत्तियों में आप अपने को किसके नज़दीक पाते हैं.टीपों को लेकर इतना घमासान और ऐसी दुरभिसंधियां चलती हैं कि निरर्थक  पोस्टें जहाँ शतक बना लेती हैं,(भले ही वह डिफॉल्ट-टीपें हों ) वहीँ कई अच्छे लेखक ,बिना टीप किये ,अपनी पोस्ट में एक अदद टीप को तरसते हैं.हम पोस्ट को लेकर सेंटीमेंटल हों या टीप को ,यह आपको,हमको,सबको सोचना है.सोचो और जल्दी टीपो,नहीं तो हम सेंटिया जायेंगे !



जेहे-नसीब श्रीमान अनूप शुक्ल जी (फुरसतिया जी) पधार चुके हैं.इस विषय पर उनकी लेखनी का कमाल देखिये,हमने तो झलकी दी  है,उन्होंने तो पूरा महाकाव्य रच डाला है ! आभार सहित 

17 नवंबर 2011

प्राइमरी का मास्टर :मेरे नज़रिए से !

प्राइमरी का मास्टर का प्रतीक-चिह्न 
ब्लॉग-जगत के चर्चित ब्लॉग्स का  जब भी ज़िक्र होगा,तो प्राइमरी का मास्टर  का एक अहम स्थान ज़रूर रहेगा. पिछली पोस्ट  में हमने अपनी ब्लॉगिंग को गतिमान बनाने व मुख्यधारा में आने के प्रयासों व उपायों के लिए  प्रवीण त्रिवेदी जी  के योगदान की चर्चा की थी .इसके लिए मैं पिछले कुछ समय से सोच रहा था और उस पोस्ट के बहाने उनका मूल्यांकन कतई नहीं करना चाहता था.मैं प्रवीण जी की  तकनीकी सलाहों का बहुत आभारी रहा हूँ और वह पोस्ट महज़ आभार-प्रकटन हेतु थी .फिर भी,डॉ.अरविन्द मिश्र , इंदु पुरी जी  और सबसे ज़्यादा अपने  अली साहब  ने मुझे इतना लठियाया  कि प्रवीण जी के बारे में ,उनके ब्लॉग (प्राइमरी का मास्टर ) के बारे में  कुछ और कहूँ  !इस पर  अली साब की टीप जेरे-गौर है,जिसने मुझे  इस पोस्ट  के  लिए प्रेरित किया :



ali ने कहा…
@ संतोष जी ,
अब जब लगभग सारी टिप्पणियां आ चुकी हैं तो कहने में कोई हर्ज नहीं है कि प्रवीण जी पे पोस्ट लिखते वक़्त आपने किंचित हडबडी से काम लिया है ! हुआ ये कि जो उनके गुण दिखने चाहिए वे ही निगेटिव शेड्स की प्रतीति कराने लगे ! अगर कोई बंदा उन्हें पहले से ना जानता हो तो उनके बारे में क्या सोचेगा ? यही कि लंद फंद और ब्लॉग जगत की खुराफातों का आशना या निष्णात व्यक्ति जबकि भाव ये आना चाहिये थे कि उन्होंने आपको ब्लॉग जगत के निगेटिव अंडर करेंट से सतर्क किया ! आपको तकनीकी रूप से सक्षम किया !

बेहतर होता जो एक नवोदित ब्लागर बतौर ही सही उनके किसी बेहतरीन आलेख का लिंक ही दे देते जिसकी वज़ह से आप उनके ओर आकर्षित हुए,उनसे प्रभावित हुए ! खैर अब तो आलेख दो तीन दिन पुराना हो गया सो मेरे सुझावों का कोई मतलब ही नहीं रह गया पर उस दिन उसे पढकर मैं खुद भी हतप्रभ रह गया था ! वे मास्टर हैं , गुणी है इसलिए उन्होंने आलेख की हडबडाहट को महसूस कर लिया होगा वर्ना उनको इससे बेहतर आलेख का हक़ बनता है !

अब चलते चलते एक मजाक...मित्रों को लठियाने से बेहतर है कि उनका लठैत बनके चला जाये :) 




प्रवीण त्रिवेदी जी 


प्रवीण जी जितने बड़े तकनीकी-महारथी हैं उससे भी बड़े पोस्ट-लेखक ! तकनीक की उनकी पोस्टें तो कमाल की हैं हीं,शिक्षा और बच्चों के मनोविज्ञान को उनने बड़े ही उम्दा तरीके से प्रकट किया है !पहले उनके लेखों की विषय-वस्तु और भाषा शैली की बानगी देखते हैं :


इस पोस्ट से उद्दृत ;


.... कक्षा का ढांचा प्रजातांत्रिक हो जिसमें सभी सदस्य अपने आप को स्वतन्त्र, जिम्मेदार और बराबर पायें। सभी को अपनत्व महसूस हो और लगे कि यह कक्षा उनकी अपनी है। अध्यापक को लगे कि यह बच्चे उनके अपने हैं और बच्चों को भी महसूस हो कि अध्यापक उनके अपने हैं और सभी को लगे कि विद्यालय उनका अपना है, जैसा कि उनका अपना घर। कक्षा में  आपसी सम्मान, प्रेम तथा विश्वास के रिश्तों का एक सूक्ष्म जाल हो जिसमें कक्षा के सभी सदस्य खुशी से सीखें और सीखायें।


एक अन्य पोस्ट से ;

एक अध्यापक या बच्चे के संरक्षक के रूप में हमें कोशिश करनी चाहिए कि बच्चा अपने अनुभवों को हमारे सामने प्रकट कर सके ...यह तभी हो सकता जब हम उसे उसके अपने बारे में उसे बात करने का अवसर दें| अध्यापक के रूप में हमें यह पूर्वाग्रह हटाना पड़ेगा कि बच्चे की घरेलू और निजी जिन्दगी के अनुभवों का विद्यालयी ज्ञान से कोई अंतर्संबंध नहीं है| जाहिर है .... ऐसे प्रोत्साही माहौल  में ही बच्चे निःसंकोच अपनी बात कह पाने में समर्थ हो सकेंगे| ऐसे माहौल को बनाने केलिए बच्चों एवं शिक्षकों के बीच अपनत्व एवं सहयोगी मित्र का रिश्ता कायम होना अति आवश्यक है। 


उक्त दोनों लेख उम्दा शिक्षण-तकनीक और बाल-मनोविज्ञान  को सही ढंग से समझने के उदाहरण हैं.इन लेखों और ऐसे  अन्य लेखों ने प्रिंट मीडिया   में भी खूब जगह पाई !एक उल्लेखनीय बात यह भी रही कि 'जनसत्ता' ने अपने चर्चित स्तंभ "समान्तर' की शुरुआत ही प्रवीण जी के लेख से करी !

पिछले काफी समय से उनकी कोई पोस्ट नहीं आ रही है,इस पर मैंने जब भी उनसे कहा तो उनका ज़वाब था,"आप जमे रहो महराज,मैं अभी कुछ दिन आराम के मूड में हूँ." इस बीच ऐसा नहीं है  कि वे बिलकुल निष्क्रिय बैठे हैं. गूगल-रीडर और ट्विटर पर चुनिन्दा लेखों या ट्विट्स  को शेयर करना ,महत्वपूर्ण पोस्टों पर टीपना वे लगातार जारी रखे हैं !फेसबुक पर भी ज़नाब खूब सक्रिय रहते हैं ! वे यहाँ  फतेहपुर पेज बनाकर उसमें काफी समय दे रहे  हैं.

इस ब्लॉग-जगत में  कई वरिष्ठ ब्लॉगर हैं जो मुझसे ज्यादा उनको और उनके लेखन-कौशल को जानते हैं.इसलिए अगर उनकी तकनीक और लेखन-कला पर वे लोग कुछ कहें  तो अधिक उपयुक्त होगा ! मैं उन्हें एक अच्छे ब्लॉगर के साथ-साथ सुहृद के रूप में भी मानता हूँ.अब इस पोस्ट के माध्यम से उनसे भी निवेदन है कि प्राइमरी का मास्टर ब्लॉग को पुनः नियमित रूप से पोस्ट-लेखन करें,ताकि तकनीक और शिक्षा सम्बन्धी मार्गदर्शन से हम वंचित न रहें !

प्रवीण त्रिवेदी जी के लिए कुछ वरिष्ठ लोगों का आग्रह कि उनके बारे में और कहा जाय ,यह बताता है कि उनको लेकर लोगों में किस तरह की ललक और  कृतज्ञता का भाव है ! इस ओर मैंने महज एक शुरुआत की है,प्रयास भर किया है ! मुझे लगता है कि अली साब इत्ते  भर से मुतमईन होने वाले नहीं हैं !

एक 'उदीयमान  या  नवोदित ' ब्लॉगर  का  विनम्र -प्रयास  !