इधर लिखते हुए इतना समय तो हो ही चुका है कि ब्लॉगिंग के बारे में अपने उच्च विचारों से भाइयों का ज्ञानवर्धन कर सकूँ ! सबसे ज्यादा बात जो मुझे महसूस हुई वह यह कि यहाँ पर लिखने से ज़्यादा टीपने को लेकर बड़ी संवेदनशीलता है.इसके लिए इतनी मारामारी है कि बक़ायदा कई मठ स्थापित हो चुके हैं. आप यदि नए-नए ब्लॉगर हैं तो आपको इन्हीं में से किसी एक में घुसना होगा.अब यह आपकी योग्यता और क़िस्मत पर निर्भर है कि वह मठ आपकी प्रतिभा को जल्द परख ले. आपका लिखते रहना से ज़्यादा ज़रूरी है ,टिपियाते रहना.आप बड़ी संख्या में टीपें पा रहें हैं तो ज़रा कुछ दिन 'आउट -स्टेशन' होकर देखिये या विश्राम करने की ज़ुर्रत करिए,सारा दंभ हवा हो जायेगा ! दो-चार रहमदिल दोस्त ही नज़र आयेंगे,आपकी पोस्ट टीपों के नाम पर पानी माँगेगी ! हाँ,पोस्ट लिखने के बाद यदि गणेश-परिक्रमा-स्टाइल में सौ पोस्टों पर भ्रमण कर आयेंगे तो निश्चित ही आपको साठ-सत्तर 'सुन्दर-भाव',चिंतनपरक आलेख' और 'प्रभावी-प्रस्तुति' के रूप में ज़वाबी-प्रसाद मिल जायेगा.आपको भी ख़ुशी होगी कि कोई नया ब्लॉगर (सयाना नहीं) यही समझेगा कि वाकई इस बन्दे में दम है !
टीपें पाने के उद्यम भी अजब-गज़ब हैं.सबसे सीधे लोग तो पोस्ट लिखकर कई जगह एक-एक लाइन लिखकर आ जाते हैं,ज़्यादा हुआ तो पोस्ट-लेखक कुछ लाइनें (जो उसे खुद समझ नहीं आतीं) कोट करके 'क्या खूब ' या 'सुन्दर प्रस्तुति' चेंपकर पोस्ट-लेखक को कृतार्थ कर देंगे !इस कोटि से थोड़ा सयाने वे होते हैं जो सम्बंधित पोस्ट पर सुन्दरता की डिफॉल्ट-टीप लगाकर अपनी नई पोस्ट की करबद्ध सूचना देंगे !अब वह यही समझे बैठे हैं कि वह यदि खुले-आम ऐसी अभ्यर्थना नहीं करेंगे तो ये महोदय आयेंगे ही नहीं.तीसरी कोटि के लोग वे हैं ,जो सयाने होने के साथ कुछ काइयाँपन भी लिंक के रूप में बिखेर देते हैं.वे यह समझते हैं कि जहाँ टीप रहे हैं,वहाँ का पोस्ट-लेखक गूगल-सर्च के द्वारा भी उस तक नहीं पहुँच पायेगा !
इस तरह टीपें हासिल करने की ये सीधी-सादी युक्तियाँ रहीं.कई बार तो लोगों को मेल कर,फोन कर(हाल-चाल के बहाने ,इसमें हाल कम चाल ज्यादा? ) भी दोस्ती के हवाले भी टीपें हथियाई जाती हैं! पर कई टीपबाज इतने शातिर हैं कि इतना सब होने के बाद भी उनकी आमद उस बेचारे की पोस्ट पर नहीं होती.इधर जितनी कम टीपें पोस्ट में दिखती हैं उतनी ज़्यादा उसकी 'हार्ट-बीट' बढ़ती है !अगर कुछ टीपबाज़ इतने शातिर हैं तो टीप हथियाने वाले भी खूब शातिर और जागरूक हो गए हैं. ऐसे लोग दाढ़ी बनाने वाली पोस्टों से लेकर टंकी पर चढ़ने व ब्लॉग-जगत को 'अंतिम-प्रणाम ' कहने की नौटंकी में माहिर हो गए हैं !
कुछ ब्लॉगर ,जो अपने को लेखक कम सेलेब्रिटी अधिक समझ बैठे हैं,इतने गैरतमंद हो उठते हैं कि अपने से कमतर किसी ब्लॉग पर जाने को वे अपना अपमान समझते हैं.कोई बार-बार भी उनके ब्लॉग पर जाकर गंभीर-टीप देता है तो भी वह उसको 'अगंभीर' ही समझते हैं,ज़्यादा हुआ तो एक-आध स्माइली ठोंक कर चले जायेंगे ( शायद यह बताना कि इस 'कूड़े' पर ठीक से हँसा भी नहीं जाता) !वे इस बहाने जताते हैं कि वे केवल लिखने और पढ़वाने भर के लिए अवतरित हुए हैं,प्रेरणा देना या उपदेसना उनके लेखकीय-कर्म में शामिल नहीं है.भले ही वह कई 'कुपोस्टों' पर जाकर ,जल-जलाकर लौटे हों.कुछ ऐसे भी सयाने टीपबाज हैं जो किसी पोस्ट को पढते हैं,घोखते हैं,मजे लेते हैं पर मुँह से बकुर नहीं फूटेगा और कन्नी काटकर चुप से ,बिना टीपे ऐसे निकल जाते हैं कि कहीं उन्हें करंट न लग जाए या इससे उनकी टीआरपी न गिर जाए !
कुछ लोग तो इतने फ़ुरसत में होते हैं कि खुराफ़ात के लिए अपनी कलम और स्याही बचा के रखते हैं .जो उनके अपने मठ के चेले होते हैं उन्हें भी वे नहीं बख्शते ! कभी किसी को अपना अलग मठ बनाते देखते हैं तो सन्निपात की अवस्था में हो जाते हैं,अपने सारे हथियार खूँटी में टाँग कर उस निरीह-ब्लॉगर को अपने पैरों पर खड़ा होने की गज़ब-शक्ति देते हैं ! कुछ ब्लॉगर तो मौके की तलाश में रहते हैं,किसी ने भी कुछ उन्नीस-बीस लिखा तो बिना लाग-लपेट के, उसके आगे-पीछे का ,अपनी यथाबुद्धि द्वारा ,संदर्भ देकर ,विलोप हो जाते हैं.ऐसे और भी कई तरह के ब्लॉगर सक्रिय हैं जो तथाकथित रूप से निष्क्रिय है पर उनके अपने मठ की जब पोस्ट आती है तो अपनी कलम घसीट ही देते हैं.
इसके उलट कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनके यहाँ यदि गलती से भी आप कभी चले गए तो ज़बरिया आपको अपना लेंगे,न-न कहते-कहते अपने मठ की दीक्षा भी दे देंगे और बिला नांगा आपको पढ़ते रहेंगे,टीपते रहेंगे और आप इनसे कुछ सीखते भी रहेंगे.इनके पास पता नहीं कौन-सा गरम-मसाला होता है कि एक ठंडी-सी पोस्ट में भी कमाल का उबाल ला देते हैं.टीपने वाले बार-बार इनके और पोस्ट के संपर्क में रहते हैं.कुछ लोग तो इतने भोले हैं कि किसी घटना -दुर्घटना से इनका लेना-देना नहीं होता.ये शांतिप्रिय ढंग से यहाँ,वहाँ टीप देते हैं,टीप पाते है,बस...इत्ते से संतुष्ट हो जाते हैं !
ब्लॉगिंग-जगत में कई तरह की प्रवृत्तियां सक्रिय हैं.अब यह आप पर निर्भर है कि इन प्रवृत्तियों में आप अपने को किसके नज़दीक पाते हैं.टीपों को लेकर इतना घमासान और ऐसी दुरभिसंधियां चलती हैं कि निरर्थक पोस्टें जहाँ शतक बना लेती हैं,(भले ही वह डिफॉल्ट-टीपें हों ) वहीँ कई अच्छे लेखक ,बिना टीप किये ,अपनी पोस्ट में एक अदद टीप को तरसते हैं.हम पोस्ट को लेकर सेंटीमेंटल हों या टीप को ,यह आपको,हमको,सबको सोचना है.सोचो और जल्दी टीपो,नहीं तो हम सेंटिया जायेंगे !
जेहे-नसीब श्रीमान अनूप शुक्ल जी (फुरसतिया जी) पधार चुके हैं.इस विषय पर उनकी लेखनी का कमाल देखिये,हमने तो झलकी दी है,उन्होंने तो पूरा महाकाव्य रच डाला है ! आभार सहित