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5 सितंबर 2013

अंकल सैम का अमन !

हमले की सारी तैयारियाँ हो चुकी हैं,
रुक्के हाथ में आ गए हैं,
सबकी सहमति दर्ज़ कर ली गई है,
मित्र देशों ने गरदनें हिला दी हैं
बस ,
अब अंकल सैम का हाथ
मिसाइल की बटन दबाने को बेताब है,
फिर सीरिया में धमाके के साथ शांति
और सारे संसार में चुप्पी छा जाएगी,
इस तरह दुनिया खुशहाल हो जाएगी
  

16 जून 2013

ओ मेरे पिता !

ओ मेरे पिता
तुमने हर दुःख सहा
माँ से भी ना कहा
कंधे पर लादकर
बोझ मेरा सहा।
घोड़ा बने,
संग खेले मेरे,
मैंने मारी दुलत्ती
सब खिलौने मेरे।
मुझको मेला घुमाया
हर कुसंग से बचाया
दिल के अंदर भरे प्यार को
सारे जग से छुपाया।
मुझमें उम्मीद दी
रोशनी दी हमें,
मेरे अस्तित्व को
एक पहचान दी।
खुद को मिटाकर
पसीना बहाकर
मुझे माँ से मिलाया
संस्कृत किया,
स्वयं को तपाकर  
ज़हर सब पिया
मुझको अमृत दिया।
 
पिता ओ पिता !
तुम नहीं हो अलग।
रूप बदला भले
पर मुझमें तेरी झलक।
चाहे जो कुछ करूँ
नहीं तुमसे उरिन,
यह जीवन तुम्हारा
है तुम बिन कठिन।
ओ मेरे पिता !

19 जनवरी 2013

सरसों और चना !


बलखाती सरसों
अलमस्त चने से बोली,
'
तू हमारे कद के आसपास आ जा
फिर मेरा दिल ले जा'
चने ने झूमकर
सरसों के पास पहुँचना
और हवा के दम पर
चूमना चाहा ,
पर वह झुकी नहीं
और हवा ने भी टका-सा जवाब दिया
अपनी मंजिल पाने के लिए
किसी और का इस्तेमाल मत कर
सरसों से मिलना है तो
उसके बराबर की बात कर.
चना तब से लेकर अब तक
सरसों की लम्बाई से दूर है,
फ़िलहाल मटर संग उसकी कट रही है
और सरसों,
उसकी मटरगश्ती पर हँस रही है.

29 नवंबर 2012

पुस्तकें मौन हैं !

पुस्तकों ने
बोलना बंद कर दिया है
और हमने सुनना,
हमारा बहरापन
खत्म हो जायेगा जिस दिन
पुस्तकें अपना मौन-व्रत खोल देंगी !

अभी पुस्तकों के मुँह बंद हैं
हमारी ज़बान की तरह,
बंद पड़े पन्नों पर
गर्द की मोटी परत है
हमारे पास इतना भी वक्त नहीं बचा
उन्हें झाड़ने और टहलाने का!

किताबें गुम हो गई हैं हममें
या हमीं बेखबर हैं इनसे,
जिस रोज़ हम तलाश लेंगे उन्हें
हम भी पा लेंगे खुद को !
 

13 अप्रैल 2012

तुम आओ तो आ जाओ !


डायरी के पुराने पन्नों को
उलट-पुलट के देखता हूँ,
तुम्हारी मुलाकातों का ज़िक्र
अब अतीत में ढूँढता हूँ.
खुद की पकड़ में सूर्यास्त 

सोचता हूँ,
इसी बहाने
तुमसे फिर मुलाक़ात हो जाये,
न वे दिन रहे,न तुम
जब घूमते रहे हम बौराए.

तुम्हारा हँसता-खनकता चेहरा
बाखुदा,अब भी मुझको याद है,
आम के पत्ते जब सिमट गए थे,
गुलाब चू पड़ा था,
तुम्हारी जुल्फ के झोंके से !

बसंत भी ठिठक गया था
निहारकर तुम्हें,
और तुमने उसी अंदाज़ से
अवाक् कर दिया था मुझको !

बिलकुल उसी तरह
अवाक हूँ मैं आज भी ,
इसीलिए
तुम्हें पन्नों में
गर्द पड़े हर्फों में
तलाश रहा हूँ इधर-उधर  !

तुम्हारा इंतजार है
हकीकत में
सपनों में,
पर अब तुम खामोश हो
युगों से,
अनजान हो
मेरे एहसास से,
और यह कि तुम तनहा हो !

तुम आओ तो आ जाओ
मेरे लिए,अपने लिए ,
क्या तुम्हें भी इंतजार है
हमारे खामोश होने का ,
मेरी तन्हाई का ?

5 अप्रैल 2012

प्यार और प्यार !

प्यार सत्य है,
प्यार मुक्ति है,
इच्छाओं से विरक्ति,
प्यार शक्ति है.
प्यार है इबादत
ईश्वर का है उपहार,
प्यार है भरोसा 
तक़दीर है ये प्यार .
प्यार ज़िन्दगी है
प्यार करम है,
प्यार है मुक़म्मल 
प्यार धरम है.
प्यार आरजू है 
प्यार इंतज़ार,
प्यार बेखुदी है
दीवानगी है प्यार ,
प्यार रोशनी है
ये सदाबहार.
प्यार अंतहीन है
प्यार बेहिसाब,
प्यार देवदूत है
प्यार है अवतार,
प्यार माँगता नहीं
मिलता नहीं है प्यार,
प्यार है ईमान
बँटता नहीं है प्यार .
प्यार का हासिल नहीं 
इसकी नहीं मियाद,
अहसास में है बसता
करता लहू से याद.
प्यार आसमान है 
प्यार है परिंदा,
यह फ़सल किसान की
उम्मीद उसकी ज़िन्दा.
प्यार बेसबब
बेगुनाह है प्यार,
प्यार है एहसास,
रूठना-मनुहार .
प्यार है बेदाग़
निर्मल बहता नीर सा,
प्यार है बौछार
दिल में लगे तीर का.
प्यार  है मरहम
बड़े घाव का,
प्यार है ख़ामोशी
प्यार इम्तहान है,
प्यार के असर से
आदमी,इंसान है !
यह अबोध-शिशु है
प्यार है निर्दोष,
प्यार तिज़ारत नहीं
प्यार है संतोष !