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20 दिसंबर 2010

सचिन के लिए !

१९ दिसंबर का दिन आम दुनिया के लिए चाहे जैसा रहा  हो ,पर भारतीयों के लिए  ऐसी मिठास दे गया जिसका एक लम्बे समय से सबको इंतज़ार था !क्रिकेट- प्रेमियों  को दक्षिण अफ्रीका से हो रहे पहले टेस्ट में हार की गंध आने लगी थी,पर सचिन ने बल्ले से ऐसा कमाल किया कि ऐसी कई हारें उस अनोखी ख़ुशबू में गाफ़िल हो जाएँ !

यूँ तो रन बनने के लिहाज़ से यह एक और  शतकीय पारी थी,पर पचासवें शतक का प्रहार इतना अधिक रहा कि जीती हुई टीम की  चमक तो फीकी पड़ ही गयी, बाक़ी दुनिया ने भी क्रिकेट के भगवान का जलवा देखा !सचिन ऐसे खिलाड़ी  रहे हैं कि उन पर आये दिन पूरी की पूरी किताबें लिखी जा रही हैं,पर वे प्रशंसा और निंदा से कोसों दूर हो चुके हैं. यह बहुत बड़ा सौभाग्य है कि उनके खेलने के साथ हम जवान हुए और अब उम्र के ढलान पर भी हैं ,पर उनका खेल के प्रति समर्पण जस का तस है ! उनका लगातार अपनी फॉर्म  में रहते हुए रन कूटना और अपने को चुस्त-दुरुस्त रखना दुनिया के तमाम  खिलाड़ियों के लिए पहेली जैसा है तो कुछ के लिए रश्क !

सचिन ने पिछले बीस साल से अब तक भारतीय क्रिकेट में अपनी उपस्थिति बराबर बनाये रखी है,यह कम अचरज की बात नहीं है. वे केवल अपने खेल की निपुणता  के लिए ही नहीं बल्कि एक  'समग्र-खिलाड़ी' के रूप में भी अपनी मिसाल आप हैं.मानवीय गुणों से भरपूर खेल-भावना उन्हें सही मायने में 'खेल का दूत' बनाती है.

उनके गुणों के पारखी  मीडिया जगत में बहुत हैं पर उनकी सही परख प्रभाष जोशी जी को थी ,जो  एक साल पहले हमें छोड़ गए !जोशी जी जाने के वक़्त भी 'सचिन-प्रेम' को सीने से  लगाये हुए थे. सचिन की इस उपलब्धि पर प्रभाष जी की भाव-विह्वल टिप्पणी की कमी का अहसास सबको तो है ही,उनके सचिन को भी होगा !

दुनिया का यह पहला शतक था जहाँ सारा हिसाब-क़िताब ही उलट-पुलट गया.उन्होंने बनाये तो सौ रन पर कहा यह गया कि उनने 'पचासा' ठोंका  ! शायद इसका कारण  हमारी न बुझने वाली प्यास और अपने भगवान से आस है.मेरी दुआ है कि उनका यह 'पचासा' अब ''शतक'' में बदले !