24 मार्च 2012

मददगार ब्लॉगर :अविनाश वाचस्पति !

अविनाशी-मुद्रा 
क़रीब  दस महीने पहले की बात है.नवभारत टाइम्स अखबार में एक व्यंग्य छपा था,जिसमें मास्टरों की जनगणना ड्यूटी के बारे में खूब मजे लिए गए थे .अविनाश वाचस्पति जी का यह लेख मास्टरों की दयनीय दशा पर प्रहार था जो व्यवस्था को भी आइना दिखा रहा था.मुझे बड़ी गुदगुदी लगी और लगा कि यही समय है जब अविनाश जी को धरा जाय.उल्लेखनीय है कि यह वह समय था,जब मैं ब्लॉग-जगत में सक्रिय होने  के लिए उतारू था.कई लोगों से मिल चुका था और कइयों से  मिलने की ताक़ में था.सच पूछिए ,इस उपक्रम में अविनाशजी सबसे बढ़िया और आसान शिकार निकले.

मैं फेसबुक में अविनाशजी से जुड़ा था पर कोई ख़ास संवाद नहीं हुआ था.उस दिन उस लेख को पढ़कर मैंने फेसबुक से उनका नंबर लिया और तुरत फोन लगा दिया.मैंने अविनाशजी से गंभीर मुद्रा में पूछा,''क्या मिस्टर अविनाश वाचस्पति बोल रहे हैं ?' उधर से आराम से जवाब आया,"जी हाँ,बोलिए." मैंने कहा,'मैं शिक्षा विभाग से बोल रहा हूँ.आपने अखबार में जो लेख लिखा है उसके लिए आप पर मानहानि का दावा किया जा सकता है." उन्होंने उसी सहज अंदाज में उत्तर दिया,'जी नहीं.मैंने ऐसा कुछ नहीं लिखा है जिससे किसी की मानहानि हो".मैंने जल्दी ही हथियार डाल दिए और जब नाम बताया तो वे खिलखिलाकर बोले,"मैं जानता था कि किसी मास्टर का ही फ़ोन होगा और मुझे तो ऐसे फ़ोन सुनने की आदत-सी हो गई है". अब इसके बाद तो उनसे बातचीत का ऐसा सिलसिला शुरू हो गया कि पूछो मत.

अविनाशजी के घर में 
पहले दौर की बातचीत जो निहायत अजनबियत के माहौल में हुई थी,इतनी रसदार रही कि हम आपस में रूटीन बातचीत करने लगे.उसी बीच उनकी बीमारी की ख़बर ने मिलने का मौक़ा जल्द ला दिया और पता-ठिकाना पूछते हुए हम उनके आवास पर मिल भी आये.उसके थोड़े दिन बाद ही अविनाशजी भी हमारे यहाँ आये और मेरे कम्प्यूटर पर हिंदी-फॉण्ट लिखने का जुगाड़ करके चले गए.ये बातें जितनी सहजता से हुईं कि लगा ही नहीं कि उनमें नवजात ब्लॉगरों से कोई अस्पृश्यता-भाव या मुँह-बिचकाऊ  ग्रंथि है.बड़े व्यक्तित्व का स्वामी भी आज के समय में ऐसा करता हुआ नहीं दिखता.जो व्यक्ति थोडा-बहुत या छोटा-मोटा ही सही ,अपना झंडा गाड़ने लगता है वह अपने खूंटे के उखड़ने के डर से किसी दूसरे को ज़मीनी-माहौल भी देने में कतराता है.अविनाशजी इस सबमें एक अपवाद की तरह हैं. जब भी कोई समस्या हो आप अनौपचारिक ढंग से बात शुरू कर दीजिये और वे लम्बी-लम्बी सलाहें फेंकने लगते हैं.घर में भी किसी भी ब्लॉगर के लिए वे स्वागत को उत्सुक रहते हैं.

अविनाशजी में नए लोगों को प्रेरित करना,उन्हें तकनीकी और दूसरे दांवपेंचों से अवगत कराना जैसे मौलिक गुण हैं.क्या आज के समय में ऐसा कोई पहलवान है जो अपने अखाड़े के गुर किसी और पहलवान को बताएगा पर वे बिला-झिझक या संकोच के ऐसा लगातार करते रहते हैं.उन्होंने कई ब्लॉगरों को तो जन्म दिया ही,कुछ प्रकाशकों को भी अपनी दिहाड़ी कमाने और सबके सामने लाने का काम किया है.हाँ ,कुछ लोग ज़रूर उनके इस जबरिया सहयोग-भाव और भोलेपन का फायदा उठा ले जाते हैं.एक एजेंट,एक डॉक्टर और एक प्रकाशक के झांसे में वे फंस चुके हैं,फिर भी नए लोगों को ऊपर उठाने में वो कोई कोताही नहीं बरतते.एक बात और है,वे   अगर ज़िद पर अड़ जाएँ तो किसी भी काम को पूरा करके ही दम लेते हैं.

पहलवानी-मुद्रा 


उनके रचना-कर्म की तो कोई मिसाल ही नहीं है.अस्वस्थता की स्थिति में होते हुए भी एक दिन में दो-तीन लेख ज़रूर लिख लेते हैं.उनकी व्यंग्य की अपनी अलग शैली है.किसी एक शब्द के पीछे-पीछे वे पता नहीं कहाँ तक पहुँच जाते हैं.उनके लेखन का तो कई लोग ओर-छोर ही ढूँढते  रह जाते हैं.कई दैनिक पत्रों में उनके नियमित कालम आते हैं और वे फेसबुक पर भी बराबर विमर्श करते रहते हैं.हर दिन वे क़रीब दस अखबार और तीन-चार पत्रिकाओं की खुराक लेते हैं.कुछ दिनों पहले ही ब्लॉगिंग को लेकर रवीन्द्र प्रभात जी के साथ उनकी एक पुस्तक आई थी और अभी एक बहुचर्चित व्यंग्य-संग्रह "व्यंग्य का शून्यकाल" भी आ चुकी है. वे अपने  सामूहिक ब्लॉग  नुक्कड़  के ज़रिये बहुत बड़ा योगदान कर रहे हैं.उनके अन्य कई व्यक्तिगत-ब्लॉग हैं,जिन्हें यहाँ समेटना संभव नहीं है.इतनी कार्यक्षमता देखते हुए हमें उनसे रश्क होता है.


मुझ पर उनकी विशेष कृपा है.उन्होंने कई तरह से और कई जगह मुझे अयाचित लाभ और मौके मुहैया कराये हैं जिनका मैं हमेशा कर्जदार रहूँगा.ईश्वर उनको चिरायु करे और ऐसे ही बना रहने दे.

64 टिप्‍पणियां:

  1. वैसे भी भले आदमी गिनती के रह गये हैं। अब आज के जमाने में कोई किसी कि इत्ती तारीफ कर रहा है तो मानना ही पड़ेगा कि वो भला आदमी होगा। दुर्लभ प्रजाति को सुरक्षित लॉकर में रखने के बजाय आप यूँ आम चर्चा कर रहे हैं! मैं भी जोर आजमाने का प्रयास करता हूँ। एकाध कमेंट झूर-झार हमरो ब्लॉग में गिर जाय टप्प से:)

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    1. आप कोशिश करें,पूरा का पूरा बोझ आपके ऊपर आ गिरेगा....लेखों और टीपों का !

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  2. च्छा लगता है ऐसे सकारात्मक अनुभव जानकर .... आपकी आत्मीयता यूँ ही बनी रहे , शुभकामनायें

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  3. अविनाशजी से वर्धा में बस एक बार ही मिलना हुआ है, जीवन्त व्यक्तित्व हैं।

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    1. ब्लॉगिंग की चलती-फिरती एनसाइक्लोपीडिया...!

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    1. यह संस्मरणात्मक-आलेख है,उनका परिचय 'नुक्कड़' पर या 'गूगल' पर ही मिलेगा.
      वैसे भी हमारा काम इत्ते-से ही चल जाता है !

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    2. आपका काम कित्ते से भी चल जाये पर आलेख तो आपने हम सबके लिए डाला है ना :)

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  5. जब आपके सौजन्य से मैं पहली बार अविनाश जी से दिल्ली में मिला तो उनके बारे में मेरी सारी पूर्व धारणाएं
    सहसा ही ध्वस्त हो गयीं -वे एक अत्यंत विनम्र ,संकोची ,मृदुभाषी व्यक्तित्व के धनी व्यक्ति लगे ,हैं !
    उनकी बीमारी से उस समय भी मुझे दुःख हुआ था -आशा है अब स्वास्थ्य सुधार पर होगा ,,,
    मेरे मन में उनके प्रति बहुत सम्मान ,श्रद्धा और शुभकामनाओं का भाव उमड़ा पड़ रहा है ..
    मुझे नहीं लगता वे ब्लागजगत में किसी परिचय के मुहताज है !

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    1. ...मगर अली साब उनके बारे में ज़्यादा नहीं जानते,बहुत दूर रहते हैं ना !

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    2. संतोष जी उत्तई दूर तो हम आपसे भी रहते हैं पर अरविन्द जी ने आपका पूरा परिचय दिया था कि नहीं ! इसलिए अब आपकी भी जिम्मेदारी बनती है :)

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  6. पडौसी(नजदीकी) हो दोस्ती भी, साथ-साथ अपनापन भी, ऐसा आजकल कम ही दिखाई देता है।

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  7. भाई जी , अच्छा संस्मरण . यादों को संजोने का नया तरीका!

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  8. साफ दिल के लोगों को झांसे में फंसने का खतरा अक्सर रहता है ।
    डॉक्टर नकली था ।
    अली जी को परिचय कौन देगा । :)

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    1. अविनाशजी से आग्रह करूँगा कि अली साब को वही अपना परिचय दें...पूरा !

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    2. लीजिए अली जी। इस लिंक को कापी करके एड्रेस बार में पेस्‍ट कर लीजिए और दबा दीजिए एंटर। फिर मेरे परिचय में प्रवेश मिल जाएगा। सब कुछ सिम सिम की तरह खुल जाएगा। वैसे सिर्फ मेरा नाम लिखकर पूछेंगे तो गूगल बाबा भी बतला देंगे, आखिर वे मेरे से मंथली वसूल करते हैं इसकी एवज में।

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    3. अली जी लिंक तो यहीं रह गया। अब यहीं से ले लीजिए http://taau.taau.in/2009/08/blog-post_27.html

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    4. अविनाश जी लिंक तो देख ली पर अब भी कहता हूं कि यह दायित्व संतोष जी का था :)

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    5. अली जी ,आप सही फरमा रहे हैं पर हम हाथ खड़ा कर रहे हैं !

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    6. मित्रता में प्रत्‍येक को पूरी तरह समर्पित रहना चाहिए। जिसको मौका मिले, अवसर हाथ लगे कार्य कर लेना चाहिए, मेरी नजर में अच्‍छी और सच्‍ची दोस्‍ती की परिभाषा यही है अली भाई।
      संतोष जी, आप हाथ मत खड़े कीजिए, कीबोर्ड से चिपकाए रखिए जब अली जी के बारे में पोस्‍ट लिखवानी होगी, तब मैं आपसे ही संपर्क करूंगा।

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  9. बहुत याराना लगता है ... ;-)

    आपको और अविनाश भाई को मेरा प्रणाम और हार्दिक शुभकामनायें !

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  10. अविनाश जी से मुंबई में ब्लॉगर्स मीट में मिलना हुआ था, पहली बार मिले थे परंतु उनकी बातों से पता ही नहीं चला कि पहली बार मिले हैं।

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  11. भूमिका भाग में रहस्य रोमांच और फिर यादों के पितारों से निकला एक सहृदय दोस्त .

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    1. अविनाशजी हमें डरा-डरा के हंसाते हैं इसलिए यह शैली अपनाई !

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  12. आत्मीयता की सोंधी गंध आ रही है पोस्ट में ... अविनाश जी को कौन नहीं जानता ब्लॉग जगत में ...

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    1. ..अभी भी कई लोग हैं जो इनकी कृपा से च्युत हैं !

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  13. अविनाश जी मददगार ब्लोगर है!...वे खुशमिजाज व्यक्तित्व के धनी है और मेरे परिचित है!

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  14. आत्मीयता भरी प्रभावी ॠणानुबंधी!!

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    1. बिना अनुबंध के ही फंस गए अविनाश जी !

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    2. फंस नहीं गए
      बंध गए
      यह बंधन है कैसा ?

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    3. इसीलिए ॠणानुबंध कहा, यह बन्धन है ऐसा

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  15. आज ही दिल्‍ली के कॉफी होम में अविनाश जी और संतोष त्रिवेदी की एक झलक देखी है।

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    1. दिल्ली में तो यह खतरा हो सकता है। दो ब्लॉगर कॉफी पीकर लौटे तो तीसरे ने उन पर पोस्ट लिख दी..! पकड़े गये घर में:)

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    2. देवेन्द्र जी,राजेश उत्साही जी के साथ पूरी गोल थी.जमघट था ब्लॉगरों का !

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    3. फेसबुक पर पूरी दुकान सजी है। आकर देख लीजिएगा http://www.facebook.com/avinashvachaspati

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  16. आप समस्‍त मित्रों का अति-स्‍नेह तारीफ को स्‍वर दे रहा है। असलियत जानने के लिए अरुण चन्‍द्र राय, ज्‍योतिपर्व प्रकाशन से अवश्‍य बात करके स्थिति साफ कर लीजिएगा।

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  17. अविनाश जी से कौन परिचित नहीं , लेखन से इतर उनके व्यक्तित्व को जानना अच्छा लगा .

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  18. अविनाश जी का परिचय आपकी कलम से अच्छा लगा ...

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  19. आत्मीय परिचय!! संस्मरणात्मक आलेख!! हम भी फैन हैं इनके!!

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    1. हमें मालूम हैं आप बड़े वाले 'फैन' हैं !

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    2. ये फैन को इनवर्टेड कॉमा में काहे रख दिए हैं माट्साब!! :)

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    3. ..क्योंकि यह ओरियंट का पीएसपीओ मॉडल है !

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  20. अविनाश जी के अच्छे स्वास्थ्य के लिए हम सब की शुभ कामनाएँ... ब्लागिंग मे नाम और नाम से ज़्यादा स्वास्थ्य कमाएं यही हमारी कामना है

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  21. त्रिवेदी जी आपकी यह रचना रेखाचितरो की श्रेणी में आती है एक अच्छी प्रस्तुति अविनाश जी के व्यक्तित्व के कई पहलुओ पर अच्छा प्रकाश डालती है

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  22. अविनाश जी की सेहत ठीक रहने के लिये शुभकामनायें।
    फ़ोटो चकाचक आई है।
    हां एक शुभकामना और कि अविनाश जी को प्रकाशक से अपनी किताब की प्रतियां लागत मूल्य पर मिलने में सफ़लता मिले। :)

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    1. आपकी शुभकामनाओं का बेसब्री से इंतज़ार था...! आभार !

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  23. आपने जो भी लिखा, मै आपसे सहमत हू, ........बड़े दिल के आदमी है वाचस्पति जी . मै भी जब उनसे मिला , बहुत ख़ुशी हुई .एकदम सरल और दूसरो की सहायता के लिए हमेशा तत्पर. .......नमन.

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  24. अरे हम तो समझे थे ये बस हमें ही फंसाये हैं !
    बहुत शातिर निकले ये तो आपको भी बनाये हैं !!

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