25 जनवरी 2013

ईश्वर कमज़ोर हो गया है ?


बड़ा आसान हो गया  है 
ईश्वर को अपराधी ठहराना  
अपनी उंगली उधर उठा देना 
ईश्वर बड़ा निरीह हो गया है आज 
वह प्रतिकार नहीं करता है 
उसके पास न किराये की पुलिस है 
और न आंसू गैस के गोले 
हम बड़ी सहजता से अपना गुस्सा 
अपने प्रवचन 
अपनी शिकायतें 
उसकी ओर उछाल देते हैं
वह जवाब तक नहीं देता 
चुपचाप सुनता और सहता है 
ईश्वर कमजोर हो गया है 
या हमें सहने के लिए 
हमें सुनने को 
कोई और नहीं बचा ?

19 टिप्‍पणियां:

  1. जब किसी पर बस नहीं तो इश्वर तो है ही ..कुछ लोगों का यही शगल है ...बढ़िया प्रस्तुति

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  2. जबरदस्त भाई जी-

    आजादी अभिव्यक्ति की, चटुक चुटीले भाव |
    ईश हुआ उन्नीस है, मत उसको उकसाव |
    मत उसको उकसाव, भक्त ही बनते भगवन |
    होता नहीं अघाव, भोग खाकर भी छप्पन |
    वह ऊपर निश्चिन्त, बजे जनता का बाजा |
    कहाँ सुने आवाज, धरा का बोले आ जा ||

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  3. अब ईश्वर की कोई सुनता ही नहीं, सेकूलर हो गये हैं सब..

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  4. ईश्वर, आस्तिक नास्तिक के खेल का खिलौना हो गया है।

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  5. अरे...उसका सरनेम तो लिखा ही नहीं आपने :)

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  6. बहुत से प्रश्नों के उत्तर देती हुई सार्थक पोस्ट ......

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  7. जबरदस्‍ती जबर्दस्‍त मत कहें
    ईश्‍वर गलत कहने के लिए भी
    आपसे हिसाब मांगेगा
    कहेगा कि करो व्‍याख्‍या
    इस कविता की संदर्भ सहित
    तब आप बगलें नहीं झाकोंगे
    जरूर झांकने लगोगे मंदिर में
    तब पूठ बैठेगा भगवान
    क्‍यों तुम वही हो न
    जो मुझे कमजोर बतला रहे थे
    अब क्‍या लेने मेरी शरण में आए हो
    आस्तिक हो तो सोच समझ कर कहो
    नास्तिकों के लिए सब छूट है
    उसकी किसी के प्रति नहीं बनती है
    जवाबदेही, न ईश्‍वर के प्रति
    न पुजारी के
    और न आपके प्रति।

    आपके लिए सचमुच जवाब देना
    कठिन हो जाएगा
    जब ईश्‍वर मांगेगा आपसे सबूत
    तब आप कहेंगे कि मैंने तो यूं ही
    सबके साथ आपको कमजोर कह दिया था

    ईश्‍वर कमजोर है कहने वालों
    पहले यह तो बतलाओ कि
    तुम ईश्‍वर को मानते हो
    देखा है उसे कहां कहां
    क्‍या गणतंत्र मना रहे हो
    सिर्फ इसलिए कि
    गणतंत्र हमारा कमजोर है
    और उसे ईश्‍वर के बहाने
    कमजोर बतला रहे हो ?

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    1. धरती के नव भगवान् जोरदार हैं-
      एक दो नहीं अपार हैं-
      इनकी महिमा अपरम्पार है-
      कहने का यही सार है-
      वह कमजोर हो गया है-
      सुनता नहीं पुकार है-
      बेबस भक्त परेशानियों से हर दिन होता दो चार है
      आभार है

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    2. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  8. हम कमजोर है हम अपनी बात ठीक ढंग से ईश्वर तक नही पहुचा पा रहे है ,,,,,

    गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाए,,,
    recent post: गुलामी का असर,,,

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  9. मै कमजोर हूँ , इस्वर नहीं |

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  10. ईश्वर - है कहाँ ? वह आज भी वहीँ है,जहाँ वह नीलकंठ हुआ . बाकी का तो अंत है

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  11. जनजीवन में ईश्‍वर हुआ प्रश्‍नवाचक ?

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  12. आजकल चित तनिक भरमाए हुवे है..,
    की हर कोई मुझे कहीं देखा हुवा लगता है.....

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  13. ईश्वर तो वैसे भी सुनता कभी.. जिसे देखो वही मुँह उठाये चला जाता है और सामने खडा होकर कमर पर हाथ रखे चीखने लगता है उसके सामने, "खुश तो बहुत होगे तुम!!" किसी ने कभी जाकर उससे कहा कि भगवन तुमने जो भी दिया है उसका धन्यवाद करता हूँ मैं! और जो तू देगा वह अवश्य मेरे लिए श्रेयस्कर होगा. मैं अपना कर्म करता रहूँ, क्योंकि तुझे पता है कब और कितना देना है!!
    सफलता का क्रेडिट अपनी मेहनत को देने वाले, असफलता का डिस्क्रेडिट देने मंदिर पहुँच जाते हैं और कमर पर हाथ रखकर बायाँ हाथ घुमाते हुए बोलते हैं - खुश तो बहुत होगे तुम!!

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