5 फ़रवरी 2013

मौसम और वो !

उसका मिजाज मौसम-सा , 
हमको हर बार दगा देता है !

मिलने को बुलाता है मुझको 
गलत हर बार पता देता है ।

कहने को कुछ नहीं होता,
जल्द एतबार जता देता है ।

रूठ कर महफिल से गए, 
मेरा कुसूर बता देता है ।

वो स्याह है,रोशन है  वही,
मेरे दिल को जला देता है ।

23 टिप्‍पणियां:

  1. सुंदर प्रस्तुति ...!!
    शुभकामनायें ।

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  2. मिलने को बुलाता है मुझको
    गलत हर बार पता देता है ,,,,,बहुत उम्दा सराहनीय प्रयास,,,बधाई संतोष जी,,,

    RECENT POST बदनसीबी,

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  3. बढ़िया है भाई-
    प्रीति-प्रतीति पते पर पहुँचे-
    ओला बारिश
    शीत चुभन ये-
    अटक-भटक चटके जो मन ये -
    शांत हो-
    शुभकामनायें-भाई-


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  4. मौसम सा उनका मिजाज़ तो ठीक है ... दगा हर बार नहीं देता .. कई बार आता है ओर बैठ ही जाता है ... मस्त हैं सभी शेर ...

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  5. वाह...सुन्दर अभिव्यक्ति।।।
    आज भोपाल को मौसम भी काफी रुमानी है जो अनायास ही कुछ याद दिला देता है।

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  6. बहुत खुबसूरत ग़ज़ल हर शेर लाजबाब , मुबारक हो

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  7. वाह...
    रूठ कर महफिल से गए,
    मेरा कुसूर बता देता है ।

    सच्ची!! दगाबाज ही है....
    अनु

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  8. आपकी इस उत्कृष्ट पोस्ट की चर्चा बुधवार (06-02-13) के चर्चा मंच पर भी है | जरूर पधारें |
    सूचनार्थ |

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  9. बहुत ही बेहतरीन गजल है....
    शानदार...
    :-)

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  10. मिलने को बुलाता है मुझको
    गलत हर बार पता देता है ।

    बहुत खूब ...

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  11. बहुत बढ़िया त्रिवेदी जी।

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  12. गाँव से ही से मोबाईल ब्लागिंग हो रही है क्या ? बढियां है!

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    1. मोबाइल इंटरनेट और लैपटॉप......फिलहाल कानपुर में !

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  13. सीधी सच्ची मन की बात बतियाती सी सुन्दर रचना !

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  14. वाह! एक पुराने गीत/गजल के शब्द याद आ गए
    दर्द देता है मुझे कोई दवा देता है
    जो भी मिलता है मेरे गम को बढ़ा देता है

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