19 जनवरी 2013

सरसों और चना !


बलखाती सरसों
अलमस्त चने से बोली,
'
तू हमारे कद के आसपास आ जा
फिर मेरा दिल ले जा'
चने ने झूमकर
सरसों के पास पहुँचना
और हवा के दम पर
चूमना चाहा ,
पर वह झुकी नहीं
और हवा ने भी टका-सा जवाब दिया
अपनी मंजिल पाने के लिए
किसी और का इस्तेमाल मत कर
सरसों से मिलना है तो
उसके बराबर की बात कर.
चना तब से लेकर अब तक
सरसों की लम्बाई से दूर है,
फ़िलहाल मटर संग उसकी कट रही है
और सरसों,
उसकी मटरगश्ती पर हँस रही है.

16 टिप्‍पणियां:

  1. इसके निहितार्थ शिष्यवर ?

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  2. बहुत खूब...

    कल ओले पड़े थे। इन बिचारों का क्या हाल हुआ होगा।

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  3. जय हो, कटाई में दर्शन ढूढ़ लिये, दमदार..

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  4. गजब की सोच,,,वाह क्या बात है,,,संतोष जी,,

    सरसों,चना,मटर,की आपस में नही पटती
    फिर कैसे होगी, मटर, चना,की मटरगस्ती,,,,

    recent post : बस्तर-बाला,,,

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  5. चलो जो मिल रहा है उसी में खुश रहना चाहिए उसे ...
    वैसे भी सरसों ले के क्या करेगा .. किसी चक्की में ही पीसना है उसे ...

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  6. हमारे यहां सरसों और चना अलग अलग उगाए जाते हैं (शायद इसीलि‍ए कि‍ कुछ यूं न करें)

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  7. सरसों के मरियल दाने , चने के खाते पीते मोटे ताज़े दानों को देखकर तो ज़रूर चिढ़ते होंगे। :)

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  8. कोमल भावो की और मर्मस्पर्शी.. अभिवयक्ति .......

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  9. बेहतरीन अंदाज़..... सुन्दर
    अभिव्यक्ति.......

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  10. सरसों बोली सुन रे चने
    कब तक रहेगा बने-ठणे
    बरसात का मौसम आया
    कीड़े ने दोनो को खाया
    जो कीडे से बच जायेगा
    घुण कच्चा चाट जायेगा॥







    अब मटर चने की मटरगश्ती

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