जड़ से सबको साफ़ किया
फिर कहते हैं माफ़ किया !
लाठी-गोली बच्चों को दी
कहते हैं इंसाफ़ किया।
‘डायर’ बनकर हमला बोला
कायर बनकर माफ़ किया।
जो भी सच की हाँक लगाता
उसको वतन-ख़िलाफ़ किया।
फ़स्ल ज़हर की पकी खड़ी है
काटो निकलो माफ़ किया !