2 सितंबर 2026

अव्वल दर्जा

 वोट चुराकर वो उछले हैं,

जीडीपी में फिर फिसले हैं।

झूठा डाटा पेश कर रहे 

देखो वो कितने छिछले हैं!


आत्म-मुग्ध रहते ये हरदम,

काम कोई अच्छा है।

हारी बाज़ी हरदम जीतें,

लोकतंत्र के ये पुतले हैं!


देश की मिट्टी रोज़ कुरेदें,

पुरखों की मूरत ढँकते।

भाईचारा ताक पे रक्खा 

मछली ताके वो बगुले हैं!


रोज़ उठाए फिरते झोला,

तंत्र, न्याय सब मुट्ठी में।

जल, जंगल, ज़मीन सब बेचा,

मंदिर तक में अब घपले हैं!


हिंदू-मुस्लिम राग अलापें,

राष्ट्रवाद के चोले में।

हम तो समझ रहे थे दोयम,

अव्वल दर्जे के निकले हैं!


- संतोष त्रिवेदी