17 फ़रवरी 2012

प्यार हुआ जाता हूँ !

तबीयत कुछ ठीक सी ,रहती नहीं अब ,
बगैर किसी मर्ज़ के,बीमार हुआ जाता हूँ !१!
साभार:गूगल बाबा 

खामोश हूँ,पर होश में हूँ मैं अभी,
ढहते हुए शहर में,मीनार हुआ जाता हूँ !२!

बुरे दिन भी ये ,कितने हसीन होते हैं,
जंगल से निकलके ,घर-बार हुआ जाता हूँ !३!

कोई समझ न पाए,दास्तां मेरी ,
धीरे-धीरे मैं भी ,ख़बरदार हुआ जाता हूँ !४!

अब दर्द को भुलाने की बात भूलकर,
ग़म के साथ रहके ,प्यार हुआ जाता हूँ !५!

42 टिप्‍पणियां:

  1. क्या कहने -अंदाजे बयाँ दमदार हुआ जाता है !
    दिल्ली के अक्स भी हैं इस रचे में !

    उत्तर देंहटाएं
  2. वाह क्या बात है बहुत सुंदर रचना प्रभावशाली रचना कुछ नया सीखने को मिला

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. अभी आपके खाने-पीने के दिन हैं,मौज करो !

      हटाएं
  3. राम के साथ इतने भी मत रम जाना कि
    ब्लोगर जगत भूलने को तैयार हुआ जाता हूँ
    जबरजस्त रचना,

    my new post...फुहार....तुम्हें हम मिलेगें...

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. मुझे लगता है राम आपने गम के लिए कहा है,उसी में आनंद है !

      हटाएं
  4. सीधे साधे शब्दों में बड़ी गहरी बात कह गये आप..

    उत्तर देंहटाएं
  5. हालात बड़े नाजुक, दिखते हैं आपके
    बिन जाने मैं भी , लाचार हुआ जाता हूँ ।

    लगता है , ग़ालिब का असर आ गया है । :)

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. जी में इक फांस कि बीमार हुआ जाता हूं
      उसकी सोहबत का तलबगार हुआ जाता हूं

      हुस्न की आंच से तपती है मेरी रूह तलक
      फिर भी उल्फत का तलबगार हुआ जाता हूं

      ये बुरे दिन जो मेरे हैं , बहुत हसीन से हैं
      ख्वाब बेशक्ल सही एक संसार हुआ जाता हूं

      हटाएं
    2. कम-अकल हूँ मैं,दुनिया न जान पाया,
      अपने ही लोगों का शिकार हुआ जाता हूँ !

      हटाएं
  6. आपका इज़हारे-हाल से कभी हंसी तो कभी मुस्कान से दो-चार हुआ जाता हूं।

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. आपका इत्ता-सा प्रेम पाकर,
      मैं तो बलिहार हुआ जाता हूँ !

      हटाएं
  7. कुछ सीख कर जाऊँगा इस पोस्ट से,
    त्रिवेदी जी आपका कर्जदार हुआ जाता हूँ।
    अच्छी रचना के लिये बधाई है आपको,
    साथ में आपका आभार किये जाता हूँ।।
    कृपया इसे भी पढ़े-
    नेता- कुत्ता और वेश्या(भाग-2)

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. मैं क्या सिखाऊँगा किसी को,
      खुद ही सिपहसालार हुआ जाता हूँ !

      हटाएं
  8. क्‍या बात है, क्‍या बात है। ये सिलसिला चलता रहना चाहिए...

    उत्तर देंहटाएं
  9. खामोश हूँ,पर होश में हूँ मैं अभी,
    ढहते हुए शहर में,मीनार हुआ जाता हूँ !२!

    बहुत ही बढ़िया......

    उत्तर देंहटाएं
  10. वाह बीमारी भी ग़ज़ल का सबब हो सकती है, यूं तो सोचा न था हमने ☺

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. वो हमारे गम में हँसेंगे,
      यूँ भी न सोचा था हमने !

      हटाएं
    2. काजल भाई ,आप नहीं समझे :) ये बीमारी वो वाली है :) मतलब गज़ल वाली :)

      हटाएं
  11. गम के दरिया में बहा जाता हूँ ...अच्छी प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  12. खामोश हूँ,पर होश में हूँ मैं अभी,
    ढहते हुए शहर में,मीनार हुआ जाता हूँ...
    बेहतरीन !

    उत्तर देंहटाएं
  13. हर शेर में हैं खयालों के दीद नये नये
    मैं तो बस दर्द का दीदार हुआ जाता हूँ

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. हर तरफ के खुल गए परदे,
      बिना ईंट की दीवार हुआ जाता हूँ !

      हटाएं
  14. ग़म के साथ रहके ,प्यार हुआ जाता हूँ......

    बेहतरीन लाईनें......
    गजब के जज्‍बात।

    उत्तर देंहटाएं
  15. वाह!!!!!संतोष जी आपकी गजल पढकर मै भी गुलजार हुआ जाता हूँ,....

    MY NEW POST ...सम्बोधन...

    उत्तर देंहटाएं
  16. बुरे दिन भी ये ,कितने हसीन होते हैं,
    जंगल से निकलके ,घर-बार हुआ जाता हूँ

    यह भी खूब रही संतोष जी.
    बुरे दिन जब हसीन हैं तो फिर वे बुरे कहाँ?

    सुन्दर प्रस्तुति के लिए आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  17. अब दर्द को भुलाने की बात भूलकर,
    ग़म के साथ रहके ,प्यार हुआ जाता हूँ !५!

    गम और प्यार का रिश्ता दर्द के रास्ते ही जाता है ... फिर बस प्यार ही प्यार रह जाता है ...

    उत्तर देंहटाएं