10 फ़रवरी 2012

यादें :नई पुरानी !


जब भी देखता हूँ ,कोई सांवली-सी सूरत,
तुम्हारा ही अक्स ,उसमें नज़र आता है !


छुप-छुप के तुम्हें देखना ,यदि  वाक़ई ज़ुर्म है,
तो ये गुनाह हमने ,कई बार किया है !


देखा जब भी आपको ,नज़रें झुकी मिलीं,
जाने खफ़ा हैं मुझसे ,या फिर अदा है आपकी !

 

वो आये तो इक खुशनुमा झोंके की तरह,
गए तो आँधियों की तरह ,उजाड़कर मुझको !


तुमको न भुला पाया, क्यों नहीं अब तक,
मेरे पास न सही ,मेरे अहसास में तो हो !






विशेष : पहले के तीन शेर  तकरीबन पचीस-बरस पुराने हैं और  आखिरी के दो ताज़ा !

38 टिप्‍पणियां:

  1. पुराने और ताजे, सब ताजे हैं! फोटो बड़ा बासंती रूचि का चेंपे हैं आप! वाह!

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  2. अब अली जी आयें और अपना हुनर दिखाएँ! कुछ कुछ क्ल्यू तो मिल गया -क्या पुराना बुखार उतर गया जो नया सर चढ़ बैठा है ? :)

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    1. नहीं वो नहीं उतरा ! यह तो पुराने और नये का फ्यूजन है :)

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    2. अली साब,मिसिर जी को थोड़ा 'कन्फ्यूज़न' है !

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    3. न फ्यूज़न है , न कन्फ्यूज़न है ! यह तो त्रिवेदी जी का इन्त्युज़न( intuition ) है ! :)

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    4. लगता है यही सही कान्क्लूजन है :)

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    5. जी हाँ,मेरा भी यही डिसीज़न है !

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    6. मौज ले रहे हैं क्योंकि बसंत का सीजन है ।
      पर अली सा की टीप सदा करती चुस्ती स्फूर्ति का परफ्यूजन हैं ।

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    7. लिख्खा है आपने करवट बदल-बदल के
      टीपा है डॉ दराल ने फोटू बदल-बदल के

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  3. वैलेन्टाइन की टीस है है या वेल इन टाइम की ...

    मौसम का असर है, या मौसमी असर!

    जो भी है, हर शे’र लाजवाब है!!

    मुझे यह बेहतरीन लगा ...
    देखा जब भी आपको ,नज़रें झुकी मिलीं,
    जाने खफ़ा हैं मुझसे ,या फिर अदा है आपकी !

    एक क़व्वाली याद आ गई
    “आंख उठाना तुम्हारा तो फिर ठीक था,
    आंख उठाकर झुकाना ग़ज़ब ढ़ा गया ...
    हाल क्या है दिलों का न पूछो सनम ..

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    1. वाकई इस शेर के पीछे एक कहानी है,उसे साझा कर रहा हूँ.

      फतेहपुर में हम जहाँ रहते थे,लड़की वहीँ पास में रहती थी.स्वभाव की शर्मीली,गज़ब की खूबसूरत,हम तीन-चार दोस्त स्कूल से उसकी वापसी पर खड़े रहते.इनमें से एक मकान-मालिक का भी लड़का था.वह जब आती तो नज़रें भी नीची होती और थोड़ा दूर से निकल जाती थी वह.मैं शेरो-शायरी करके दोस्तों को सुनाता रहता ,पर बाद में पता चला कि मकान -मालिक के लड़के ने उससे शादी कर ली.शादी के काफी दिनों बाद इक दिन अचानक हमारी मुलाक़ात हुई तो उस लड़के ने अपनी पत्नी से वह भेद बता दिया कि ये आप के ऊपर शायरी करते थे.मैं चुप !!

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    2. हम्म के बाद संतोष जी जो कहते हैं उसके अनुसार मेरा कहना बनता है कि चाबी नहीं खोनी चाहिये :)

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    3. हाय!माशूक हो गई मालिक मकान की और हम किरायेदार भी न रहे(:-(

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    4. वाकई ,बड़ा तकलीफदेह रहा यह !

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  4. यूं दिल के तदपने का कुछ तो है सबब आखिर,
    या दर्द ने करवट ली, या तुमने इधर देखा!
    त्रिवेदी जी, सर्द हवाएं जब हड्डी तक पैबस्त होने लगें तो दर्द और शायरी दोनों उभरने लगती हैं.. दर्द पुराना - शायरी नई! कुल मिलाकर यादें-नई पुरानी!

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    1. यह भी खूब रही ज़ालिम,
      सताते भी हो,हंसाते भी हो !

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  5. छुप-छुप के तुम्हें देखना ,यदि ज़ुर्म है कहीं ,
    तो ये गुनाह हमने ,कई बार किया है !

    शानदार ....
    आनंद आ गया संतोष भाई !

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    1. आपके आनंद आने से हमारा कहना सार्थक हुआ !

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  6. पुराने और नए दोनों में गजब की ताजगी है....

    बेहतरीन।

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  7. स्मृतियों की गहराई में एक याद निकल आयी धीरे।

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  8. भाई जी , ...यानी कि नई बोतल में पुरानी शराब ! अंतराल स्मृतियों को और गाढ़ा करता ही है !

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    1. बुढ़ापे में यह गाढ़ापन ज़्यादा असर करता है !

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  9. रचना की (और चित्र की भी) ताजगी लाजवाब है.

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  10. जाने खफ़ा हैं मुझसे ,या फिर अदा है आपकी ! :) वाह !

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