23 अक्तूबर 2012

चींटी और हाथी !

हाथी चींटी से कहे,तू ना समझे मोहि
मेरे पांवों के तले,मौत मिलेगी तोहि

चींटी बोली नम्र हो,मद से मस्त न होय
वंशहीन रावण हुआ,कंस न पाया रोय

मरने से बेख़ौफ़ हूँ ,चलती अपनी चाल
हर पल जीती ज़िन्दगी,नहीं बजाती गाल ।।

छोटी-सी काया मिली,इच्छाएँ भी न्यून
छोटे-से आकाश में,खुशियाँ फैलें दून

पेट तुम्हारा है बड़ा,धरती घेरे खूब
परजीवी बन चर रहा,इसकी-उसकी दूब


सावधान लघु से रहो,सदा उठाये सूंड़
चींटी मारेगी तुझे,तू अज्ञानी,मूढ़
 

33 टिप्‍पणियां:

  1. चींटी बोली नम्र हो,मद से मस्त न होय ।
    वंशहीन रावण हुआ,कंस न पाया रोय ।।
    ..वाह!

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    1. आपका आभार ...आपकी सलाह से 'छोटी-सी काया मेरी' को 'छोटी-सी काया मिली' कर दिया है !

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  2. वाह . पर चीटी हाथी को मार भी सक्ती है

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  3. आपकी पोस्ट बुधवार (24-10-2012) को चर्चा मंच पर । जरुर पधारें ।
    सूचनार्थ ।

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  4. वाह बहुत बढ़िया...
    छोटी-सी काया मिली,इच्छाएँ भी न्यून ।
    छोटे-से आकाश में,खुशियाँ फैलें दून ।।

    और एक हम हैं......इच्छाओं का अंत नहीं...
    सादर
    अनु

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  5. सहमत

    अपनी काया से डबल, दौड़ उठा कर बोझ ।

    हाथी हारेगा बड़ा, चींटी जीते सोझ ।

    चींटी जीते सोझ, खोज लेती झट दुश्मन ।

    अंकुश करे गुलाम, बंधे हाथी झट बंधन ।

    रहन सदा सचेत, चीटियाँ होती कटनी ।

    चटनी जैसा चाट, दिखाएँ ताकत अपनी ।।

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  6. उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

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  7. चींटी के सुर में हाथी से दोहे . :)
    बहुत खूब.

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  8. सबकी सबसे होड़ लगी है...पता नहीं कौन निकलेगा आगे...

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  9. सावधान लघु से रहो,सदा उठाये सूंड़ ।
    चींटी मारेगी तुझे,तू अज्ञानी,मूढ़ ।। बहुत बढ़िया

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  10. मगर हाथी तो दूब नहीं चरता ---
    इसकी उसकी चर रहा हरियाली भरपूर

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  11. कलकत्ता की दुर्गा पूजा - ब्लॉग बुलेटिन पूरी ब्लॉग बुलेटिन टीम की ओर से आप सब को दुर्गा पूजा की हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनायें ! आज की ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  12. 23 अक्तूबर 2012

    चींटी और हाथी !
    हाथी चींटी से कहे,तू ना समझे मोहि ।
    मेरे पांवों के तले,मौत मिलेगी तोहि ।।

    चींटी बोली नम्र हो,मद से मस्त न होय ।
    वंशहीन रावण हुआ,कंस न पाया रोय ।।

    मरने से बेख़ौफ़ हूँ ,चलती अपनी चाल ।
    हर पल जीती ज़िन्दगी,नहीं बजाती गाल ।।

    छोटी-सी काया मिली,इच्छाएँ भी न्यून ।
    छोटे-से आकाश में,खुशियाँ फैलें दून ।।

    पेट तुम्हारा है बड़ा,धरती घेरे खूब ।
    परजीवी बन चर रहा,इसकी-उसकी दूब ।।


    सावधान लघु से रहो,सदा उठाये सूंड़ ।
    चींटी मारेगी तुझे,तू अज्ञानी,मूढ़ ।।

    प्रस्तुतकर्ता संतोष त्रिवेदी

    वाह दोस्त एक बोध कथा एक संदेशा लो प्रोफाइल ज़िन्द्गी का लिए हुए है आपकी पोस्ट .

    ram ram bhai
    मुखपृष्ठ

    मंगलवार, 23 अक्तूबर 2012
    गेस्ट पोस्ट ,गज़ल :आईने की मार भी क्या मार है
    http://veerubhai1947.blogspot.com/

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  13. चींटी ही जीतेगी ....
    शुभकामनायें आपको !

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  14. केजरीवाल के बहाने अब चींटी पर सहानुभूति हो चली है .....बेचारा हाथी शरीर के चक्कर में चींटी की मौत मारा जाएगा ..... और ......नेताओं का पता नहीं ?

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  15. चींटी हाथी दोनों के दुश्मन तो आदमी है। बेकार में वे दोनों अरझे हुये हैं। दोनों को विजयदशमी मुबारक हो।

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  16. सभी मित्रों का आभार एवं दशहरे की शुभकामनाएँ !

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  17. बहुत बढ़िया प्रस्तुति ..
    विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनायें

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  18. विजय दशमी की शुभ कामनाएं , सुन्दर सृजन को बधाईयाँ जी l

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  19. सावधान लघु से रहो,सदा उठाये सूंड़ ।
    चींटी मारेगी तुझे,तू अज्ञानी,मूढ़ ।।

    अपने से छोटे को कमजोर कभी मत समझो,,,,

    विजयादशमी की हादिक शुभकामनाये,,,
    RECENT POST...: विजयादशमी,,,

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  20. छोटी-सी काया मिली,इच्छाएँ भी न्यून ।
    छोटे-से आकाश में,खुशियाँ फैलें दून ।।

    ...वाह! सभी दोहे लाज़वाब और सार्थक...

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  21. सावधान लघु से रहो,सदा उठाये सूंड़ ।
    चींटी मारेगी तुझे,तू अज्ञानी,मूढ़ ।।bahut khoob...

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  22. जीवन के गहनतम भाव की शिक्षा देती ये रचना काफ़ी प्रभावशाली है।

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  23. वाह क्या कमाल के दोहे हैं । बहुत सामयिक भी।

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  24. दीवाली की अनेक शुभ कामनाएँ !

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