23 अक्तूबर 2011

धरती माता ,जागो जागो !

पिछले कुछ दिनों से मेरा बेटा गाँव जाने को लेकर इतना उत्सुक है कि रोज़ सुबह उठकर बताता है कि इतने दिन बचे हैं ! अबकी दिवाली में उसे लेकर मैं गाँव जा रहा हूँ,ताकि वह त्यौहार का कुछ मतलब समझ सके.पिछली बार भी जाने का कार्यक्रम बनाया था पर आख़िरी मौक़े पर जाना न हो पाया.

बेटा आठ साल का है और दिवाली को उसने शहरी तौर पर ही जाना है.मुझे उसको वहां ले जाना ज़रूरी इसलिए लगा कि बचपन में जैसा मैं महसूस करता था,अब वैसा तो नहीं पर उस जैसा कुछ तो उसे दिखे और वह जान सके कि त्यौहार असल में होते क्या हैं ?

मुझे अपनी दिवाली बेतरह याद आती है.कुछ दिनों पहले से ही घर-बाहर की सफ़ाई का अभियान चलता था और इसे ठेके पर नहीं कराया जाता था बल्कि स्वयं परिवार के सभी सदस्य जुटते थे.घर-दुवार को  पूरी तरह से चमकाया जाता था.आंगन,खमसार, दहलीज़ और चौपारि को गोबर से लीपा जाता  और उस पर रंगोली बनती.दीवारों पर चूने से पोताई होती.कच्चे घरों में माटी का पोतना फेराया जाता.इस तरह दिवाली के आते-आते  सबके घर बिलकुल दमकने लगते.

मैं ज्यादा पटाखे छुड़ाने का शौक़ीन तो नहीं रहा पर छोटा तमंचा और बिंदीवाली डिबिया के साथ दो-चार दिन पहले से ही शुरू हो जाता .तमंचे का प्रयोग तो काफी बाद में आया ,पहले तो ईंट के टुकड़े से ही दगने वाली  'टिकिया' पर वार करके मज़ा लिया जाता था.'दईमार' और 'मिर्ची' भी खूब प्रसिद्ध पटाखे थे.


दिवाली से एक दिन पहले नरक-चतुर्दशी को अम्मा सुबह-सुबह हम लोगों को जगातीं और नहाने के बाद लाइ,चंदिया,चिरइया(खिलौने) का भोग लगवातीं !कुम्हार दो दिन पहले ही दिए दे जाता था.उन्हें दिवाली की शाम को धुलकर तैयार किया जाता.सूर्यास्त होने के बाद अम्मा आंगन में पूजा-पाठ का इंतजाम करतीं,सारे दिए वहीँ रखे जाते,घी-तेल और बाती भी तैयार होती .जैसे ही,अँधेरा शुरू होता, दियों  को अलग-अलग जगह ,घर के हर आले में .हर कोने में .छत की मुंडेर पर ,दरवाज़े पर करीने से धर दिया जाता.


इसके बाद असली धमाल शुरू होता.हम छोटे भाई के साथ हाथों में छुरछुरिया लेकर दुवारे(घर के बाहर खुला बड़ा स्थान) के एक कोने से लेकर दूसरे कोने तक दौड़ते और साथ में ज़ोर-ज़ोर से आवाज़ लगाते,"आज दियाली,काल दियाली ,धरती माता ,जागो जागो "! उस समय हम परब के पूरे उफान पर होते और घर के बड़े-बूढ़े हमारी यह गुहार सुनकर आनंदित होते.इसके बाद तो पटाखे आधी रात तक छूटते  रहते.अगले दिन सुबह हम भाई-बहनों में होड़ लगती कौन कितनी 'दियाली' पाता है ? हाँ, अम्मा एक विशेष तरीके से दिया जलातीं,जिसके बने हुए काजल को हम साल भर अपनी आँखों में रांजते !

सोचता हूँ ,जब बेटा गाँव की दिवाली को महसूसेगा तो उसे आँगन,आला,छत,मुंडेर आदि कैसे लगेंगे.शहरों में बंद कमरों में मनाई जाने  वाली दिवाली उसके लिए गाँव में कितने धरती और आसमान के सपने दिखाएगी ? 



24 टिप्‍पणियां:

  1. खूबसूरत यादें हैं गाँव की, बचपन की दीवाली की। बेटे को अच्छा लगेगा।

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  2. आपने तो अभी से दीवाली की संक्रामकता शुरू कर दी .....ये अच्छी बात नई.....पटाखे तो कान फोड़ने लगे हैं ..मैं भी हमेशा पैतृक घर ही दीवाली मनाता रहा हूँ ..गाँव में .....पटाखे से एक अंगुली उड़ गयी थी बचपन में जाने कैसे जम गयी ..गदेला था तभी गदेली जल गयी ..एक माह तक मुट्ठी छिपाए छिपाए घूमता रहा ..कोई भांप नहीं पाया और वह भी ठीक हो गयी .....रसोईं में एक हानिरहित पटाखे में विस्फोट हो गया -कई साल बाद लोग यह मेरी करतूत थे -आज आपने फिर यादों के जखीरे में पलीता लगा दिया है ...आब आप को सावधान किये दे रहा हूँ ......घर परिवार बन्धु बांधवों और पूरी बैसवारी (बसवारी समाहित ) को मेरी दीपावली की अनन्त अशेष इन्द्रधनुषी फुलझड़ी शुभकामनाएं !

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  3. पढ़कर लग रहा है कि अपने बच्चों को भी घुमा आते हैं गाँव।

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  4. दीवाली की शुभकामनायें...
    छुरछुरिया के प्रति लगाव भूल से गए थे ! याद दिलाने के लिए आभार !

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  5. मिट्टी से जुड़े होने का सुख , अच्छा लगा संमरण

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  6. शहरों में माचिस कि डिब्बी जैसे घरों में कहाँ छोड़ पाते हैं पटाखे ... न आँगन है न दहलीज़ ...

    दीपावली की शुभकामनायें

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  7. दीपावली की शुभकामनाएं ||
    सुन्दर प्रस्तुति की बहुत बहुत बधाई ||

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  8. दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं .....

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  9. कितने भावुक इंसान हो सन्तु दा ! अपनी आँखों से उन्हें अपना गाँव दिखाना चाहते हो ? महानगरों मे बड़े हुए ये बच्चे अपने आपको उस माहोल मे एडजस्ट कर पायेंगे? बहुत छोटे हैं शायद रम जाए वहाँ.
    ऐसे ही हम दिवाली मनाया करते थे.सबसे ज्यादा खुशी मुझे होती त्योहारों की क्योंकि मम्मी हर त्यौहार पर नई फ्रोक दिलवाती थी चोबेजी की दूकान से.इलाहाबाद मे हमारे एरिया मे वो एक मात्र रेडीमेड कपड़ों की दूकान थी.मैं सबसे महंगी फ्रोक खरीदती थी चौदह रूपये की. एक दिवाली पर पटाखा फोड़ते हुए घबराहट के कारण वो जाने कैसे मेरे सिर पर ही गिर गया.बाल जल गये.भाई ने हाथ से झटक कर तुरंत फेंक दियाथा किन्तु डर ऐसा बैठा कि आज भी पटाखों से ज्यादा शोर मेरे चीखने का होता है. टीकड़ी के उपर ठीकरा रखकर दूर से निशाना मारती थी. टीकड़ियाँ फूटती या नही.मालूम नही पर....शानदार निशाना लगाना सीख गई. एए राइफल से निशाना लगाना पापा ने सिखाया.अब तो सब भूली हुई बाते हो गई है. गाँव जाओ.दिवाली मना आओ. अब तो गांवों मे भी खपरेल के घर,मिटटी के चूल्हे,हाथ की चक्की,कच्चे आँगन खत्म होते जा रहे हैं.
    ऐसा घर आज भी मेरे सपनों मे आता है. बच्चों को ले जाओ.शायद उनके साथ भी ये सब चले आए और.......... जीवन भर साथ रहे उनके.
    बहुत प्यारा लिखा संतोष! दीपावली की ढेर सारी बधाइयाँ.और उस बच्चे को प्यार जो कितनी इमानदारी से सब कुछ बोल देता है. बहुत मासूम है यह बच्चा.इसे इसी तरह संभाल कर रखना अपने भीतर.

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  10. Aankhon me kajal ab to sabko virus jaisa lagta hai aur ab iska antivirus bhi nahin hai . Abgaon bhi gaon kahan rah gaye hain, gaon wale shahar me SHAHARI ho gaye hain.

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  11. बढिया संस्‍मरण ..
    .. सपरिवार आपको दीपावली की शुभकामनाएं !!

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  12. यह अफसाना तेरा भी है मेरा भी.
    यादें जीवंत हो गई.
    दीपोत्सव की शुभकामना स्वीकार करें.

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  13. सभी ब्लॉगर मित्रों का आभार !सभी को दिवाली की असीम शुभकामनाएँ !

    @इंदु पुरी जी आपने हमें अपना विशेष स्नेह दिया है,आभार !
    बच्चा बने रहने में आप जैसे बड़े बच्चों का खास योगदान है !

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  14. पर हमारे गांव में दिवाली पर इस तरह का शहरों जैसा धूम धड़ाका नहीं होता...

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  15. आपको एवं आपके परिवार के सभी सदस्य को दिवाली की हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनायें !
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

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  16. दीपवली में तो नहीं छठ में हम भी गांव जाएंगे। बच्चों को भी ,,,।


    आपको एवं आपके परिवार के सभी सदस्य को दिवाली की हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनायें!

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  17. यादें ..........



    दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें स्वीकार कीजिए.

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  18. क्या बात है,खूबसूरत होती है बचपन की यादे,सुंदर प्रस्तुती,
    मेरी ननिहाल भी जिला-रायबरेली,लालगंज के पास 'रौतापुर,गाँव में है

    दीपावली की हार्दिक शुभकामनाये....

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  19. @dheerendra11 मेरा भी गाँव आपसे ज़्यादा दूर नहीं है.दूलापुर (सहोलेश्वर मंदिर के पास ) आप जानते होंगे !

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  20. badhiya yaden hain........sayad bhule yadon ke kuch aks nazar aayen......

    poore baiswari ko diyali ki subh:kamnayen....

    sadar.

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  21. आपको सपरिवार दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें ।

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  22. पोस्ट अच्छा लगा । मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है । दीपावली की शुभकामनाएं ।

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  23. देर से ही सही ...हमरी भी शुभकामनाएं स्वीकारो महाराज !!!

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