17 जून 2012

मेरा हासिल हो तुम !




तुम गए कहीं नहीं ,रूह में शामिल हो तुम,
सुर में हो,हर साज में,दर्द में शामिल हो तुम ||

हर ख़ुशी तुमसे मिली,गम को हमने कम किया,
हर भटकती नाव के ,बन गए साहिल हो तुम ||


सरहदी दीवार तोड़ी,नफरतों को कम किया,
जी उठी हर गज़ल,प्यार के काबिल हो तुम ||


दुखते हुए हर ज़ख्म में, तुमने मला मरहम,
सब चला जाये मगर,बस मेरा हासिल हो तुम ||


जब भी गुम हो जाऊँगा,दुनिया की भीड़ में,
ग़ज़लें तुम्हारी ढूँढ लेंगी,मुझमें ही शामिल हो तुम ||




आपका पाकिस्तान रेडियो को दिया गया एक लंबा साक्षात्कार  (१९७०)



30 टिप्‍पणियां:

  1. बड़ी दूर से आये हैं-
    दूर की कौड़ी लाये हैं -
    सादर नमन फिर से-
    क्या गजल गाये हैं |

    आभार भाई ||

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  2. बहुत खूबसूरत पोस्ट....
    सरहदी दीवार तोड़ी,नफरतों को कम किया,
    जी उठी हर गज़ल,प्यार के काबिल हो तुम ||

    सुन्दर शेर.....

    शुक्रिया

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  3. हर ख़ुशी तुमसे मिली,गम को हमने कम किया,
    हर भटकती नाव के ,बन गए साहिल हो तुम ||

    बहुत सुंदर भावभीनी श्रद्धांजली ....!!उस महानात्मा को नमन ...
    मौसीक़ी को नमन ....

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  4. सरहदी दीवार तोड़ी,नफरतों को कम किया,
    जी उठी हर गज़ल,प्यार के काबिल हो तुम,

    वाह ,,,, बहुत खुबशुरत गजल ,संतोष जी

    RECENT POST ,,,,,पर याद छोड़ जायेगें,,,,,

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  5. संतोष जी,
    ... आज तो आपने मुशायरा लूट लिया , मंच फाड़ दिया , कमाल कर दिया , धमाल कर दिया , फन्ने खां बने कवियों का जीना मुहाल कर दिया !

    शम्म-ए-महफ़िल आपके पास रौशन हुई और फिर वहीं उजाले बिखेरती रही शब भर :)

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  6. सरहदी दीवार तोड़ी,नफरतों को कम किया,
    जी उठी हर गज़ल,प्यार के काबिल हो तुम ||

    bilakul

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  7. बड़ी ही हृदयस्पर्शी श्रद्धांजलि दी है आपने..

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  8. शब्दों की श्रद्धांजली - बहुत गहरी है

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  9. सरहदी दीवार तोड़ी,नफरतों को कम किया,
    जी उठी हर गज़ल,प्यार के काबिल हो तुम ||

    जी हाँ.... विनम्र नमन

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  10. सरहदी दीवार तोड़ी,नफरतों को कम किया,
    जी उठी हर गज़ल,प्यार के काबिल हो तुम ... सही है!

    अभी नेट-कनेक्सन बहुत स्लो है, बाद में बतकही सुनूंगा, आभार जानकारी में लाने के लिए!

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  11. मेहदी हसन की गाई गजलों ने ने सुन्दर ग़ज़ल लिखवा दी आपसे ...

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  12. वाह, यह हुयी शहंशाह की सच्ची श्रद्धांजलि

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  13. मेंहदी साहब की बातचीत सुनकर अच्छा लगा।

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    बेहतरीन रचना

    केरा तबहिं न चेतिआ,
    जब ढिंग लागी बेर



    ♥ आपके ब्लॉग़ की चर्चा ब्लॉग4वार्ता पर ! ♥

    ♥ संडे सन्नाट, खबरें झन्नाट♥


    ♥ शुभकामनाएं ♥
    ब्लॉ.ललित शर्मा
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  15. सुने-सुनाए जाने कितने, दिल तक पहुंचे चंद ही
    बात उट्ठी जब ग़ज़ल की,याद आए तुम ही तुम

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  16. मेहँदी साहब की मखमली आवाज़ का जादू जितना गज़लों में है उतना ही सुनने में हैं ...

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  17. जब भी गुम हो जाऊँगा,दुनिया की भीड़ में,
    ग़ज़लें तुम्हारी ढूँढ लेंगी,मुझमें ही शामिल हो तुम ||
    बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ...आभार

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  18. सुर में हो,हर साज में,दर्द में शामिल हो तुम ||

    :):):)


    pranam.

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  19. जब भी गुम हो जाऊँगा,दुनिया की भीड़ में,
    ग़ज़लें तुम्हारी ढूँढ लेंगी,मुझमें ही शामिल हो तुम ....waah bahut khoob....

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  20. सरहदी दीवार तोड़ी,नफरतों को कम किया,
    जी उठी हर गज़ल,प्यार के काबिल हो तुम ||

    ...बहुत खूब! बहुत सुन्दर प्रस्तुति...

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  21. खूबसूरत गजल पेश की है ..आपने संतोष जी
    मेरे गीत के विमोचन में आपसे मिलकर बहुत प्रसन्नता हुई

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