8 नवंबर 2010

ओबामा जी आए हैं !

ओबामा जी आए हैं,ओबामा जी आए हैं ,
हम सब उनको  ताक रहे हैं
हमरी  ख़ातिर  का लाए हैं ?

पर ऊ तो निकले बड़े शिकारी
आए करने हमको ख़ाली,
हमको तो झुनझुना दे दिया
सरका दी पड़ोस में थाली !

ओबामा जी आए हैं,ओबामा जी आए हैं !

उनके स्वागत में तो हमने
सारी 'लाल-दरी' बिछवा  दी,
बदले में कोरे वादे पाए,
ख़ुद कर ली अपनी बर्बादी !

कब तक मुँह ताकेंगे उनका
स्वाभिमान कब सीखेंगे ?
घिसट-घिसट कर चलना छोड़ें
तभी विश्व के साथ बढ़ेंगे !

ओबामा जी आए हैं,ओबामा जी आए हैं !

4 टिप्‍पणियां:

  1. कब तक मुँह ताकेंगे उनका स्वाभिमान कब सीखेंगे ?

    जवाब कौन देगा ?

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  2. जवाब तो हमें ही देना है पर हमारे प्रतिनिधि समझें तब ना !

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  3. बचपन में सुना था,

    तुम क्या जानों राजनीति की, घातें और प्रतिघातें।

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  4. @ प्रवीण पाण्डेय बचपन से लेकर आज तक कुछ भी तो नहीं बदला है राजनीतिक परिवेश में !
    हमारी प्राथमिकतायें बदल रही हैं,यही चिंतनीय है.

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