16 मार्च 2014

चुनावी-होली !

लोटा उठाने के दिन आ गए हैं,
नोटा दबाने के दिन आ गए हैं ।
 

मोहब्बत जो दिल में रही आप से,
दुख है, भुलाने के दिन आ गए हैं ।
 

हुई बंद शहनाई बिस्मिल्ला खां की,
तुरही बजाने के दिन आ गए हैं ।

बहुत पढ़ लिए पैगामे-मोहब्बत,
दिलों को जलाने के दिन आ गए हैं ।

हर हर महादेव,भोले को भूले,
मोदी बनाने के दिन आ गए हैं ।

होली चुनावों के मौसम जो आई,
गर्दा उड़ाने के दिन आ गए हैं।

उनकी नजर से कब तक बचोगे,
पहाड़े पढ़ाने के दिन आ गए हैं।

6 टिप्‍पणियां:

  1. जय हो, दिन तो आते ही हैं, किसी न किसी के। जिये जायें।

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  2. पहाड़े पढ़ाने के दिन आ गए हैं।

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  3. आपकी बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति
    --
    आपकी इस अभिव्यक्ति की चर्चा कल सोमवार (03-03-2014) को ''होली आई रे आई होली आई रे '' (चर्चा मंच-1554) पर भी होगी!
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर…!

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    रंगों के पावन पर्व होली की हार्दिक शुभकामनाएँ।

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  5. अगर महादेव काम न आये तो मोदी काम आ जाए शायद ...ये दो हज़ार वर्षों की गुलामी से मुक्ति का शायद साधन बन जाए. वैसे संभावना क्षीण ही है .. बहुत सुन्दर प्रस्तुति .. .. आपको होली की हार्दिक शुभकामनायें ..

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  6. बहुत सुन्दर
    होली की हार्दिक शुभकामनाऐं ।
    new post: ... कि आज होली है !

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