28 फ़रवरी 2010

होली या ठिठोली !

हम तो यारों रंग ते खेली,वी ताने बन्दूक।
हमरी ते तो पानी निकरै,औ उनकी ते हूक। ।

हमरे रंग मिलावटी ,उनके असली लाल।
बच्चे भी अब डर रहे, देख अबीर-गुलाल । ।

होली आते ही हुए ,वो तो मालामाल।
नकली मावा भले ही ,सबको करे हलाल। ।

गुझिया,खुरमा खो गए बचपन के पकवान।
फागुन में ही बुझ गए ,बुढऊ के अरमान। ।

ना कान्हा मथुरा मिलैं,नहीं अवध रघुबीर।
फाग सुने से जाए ना ,हमरे मन की पीर। ।

6 टिप्‍पणियां:

  1. होली के पावन अवसर पर लाजवाब प्रस्तुति , आपको होली की बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकानायें ।

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  2. जब कोई बात बिगड़ जाए
    जब कोई मुश्किल पड़ जाए तो
    तो होठ घुमा सिटी बजा सिटी बजा के
    बोल भैया "आल इज वेल"
    हेपी होली .
    जीवन में खुशिया लाती है होली
    दिल से दिल मिलाती है होली
    ♥ ♥ ♥ ♥
    आभार/ मगल भावनाऐ

    महावीर

    हे! प्रभु यह तेरापन्थ
    मुम्बई-टाईगर

    ब्लॉग चर्चा मुन्ना भाई की
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  3. वाह जी वाह !
    बिल्कुल खांटी बैसवारी निकले आप !
    होली की शुभकामनाओं सहित !

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  4. पूरा पढ़े और पूरा मज़ा लिए

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  5. होली की बहुत - बहुत शुभकामनाएं...

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  6. बढ़िया कविताकारी! शुभकामनाएँ!

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