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30 जुलाई 2012

नीके दिन भी आइहैं !

भ्रष्टाचारी-बेल अब ,दिन प्रति बढ़ती जाय |
साँस उखड़ती जा रही,आस गई कुम्हिलाय ।।

रहे रहनुमा नाम के,देश बेंच कर खाँय ।
जन्मभूमि की आबरू,देते रोज़ गवाँय ।।

हवा और माटी कहे,मिली तुम्हारे खून।
काहे के हो रहनुमा,झूठे सब कानून ।।

सत्ता-मद में डूबकर ,भूल गए आचार ।
नारायण के भेष में,फ़ैल रहा व्यभिचार ।।

डरता है ईमान अब,उखड़ रहे हैं पाँव ।
भ्रष्टाचार बदल रहा,रोज़ पुराने दाँव ।।

तुलसी मद किसका रहा,सदा एक-सा काल ।
आह करेगी राख सब,साखी दीनदयाल ।।

लहर चली छोटी सही,यही बनेगी ज्वार ।
नीके दिन भी आइहैं,तू मत हिम्मत हार ।।



25 जुलाई 2012

बादल को किसने देखा है ?

रोज़ सुबह उठकर
बालकनी से निहारता हूँ,
मेरे नीले आसमान में
बादलों के काले-घुंघराले निशान
नहीं दिखते दूर-दूर तलक |
दिल एकदम से बैठ जाता है,
फ़िर से बालकनी को छोड़कर
बादलों को दो बातें सुनाकर
सुखा देता हूँ अपना हलक |

दिन में भी कई बार
देखता हूँ आकाश को
मानसूनी-मौसम में
सीधा-सपाट |
मेह के बिना,
कितना बंजर है वह ?
हम ताकते हैं उससे
उम्मीद की फ़सल
जबकि पत्थरों से फोड़े हैं
खुद अपने ललाट |

अपनी प्रगति की दौड़ में
बिसरा दिया प्रकृति को,
खा गए उसके सब फल |
सोख लिया उसके समुद्र को,
भर लिया असीमित पेट
खाली कर धरती की कोख
लूट लिया नई पीढ़ी के स्वप्न
दे दिया सीमेंट के महल |

अब आसमान को निहारने में
आँख भी साथ नहीं देती,
ज़मीन के साथ-साथ
अब यह भी नम नहीं होती|
बाबा नागार्जुन ने बहुत पहले
बादल को घिरते देखा था,
हम आज की दुनिया में
आगे बढ़ते
प्रगति करते हुए
महज़ कागजी-सवाल करते हैं,
'बादल को किसने देखा है ?'

18 जुलाई 2012

भूले अपना देश !

सावन झाँके  दूर से,बेबस है इंसान  ।
कब तक सोखेगी धरा, धूप हुई हलकान ।।


पढ़-लिख काया  बदल ली,बदले नहीं विचार ।
कौआ  कोयल-भेष में,करता शिष्टाचार ।।


शब्द अर्थ को खो रहे,भटक रहे हैं छंद।
लिखते कुछ,होते अलग,ब्लॉगर-लेखक-वृन्द ।।


तुलसी इस संसार में ,वही बड़ा विद्वान।
खड़ी फ़सल  में आग दे,बोए  निज अभिमान ।।


लिपा-पुता चेहरा दिखे,भोला-सा इन्सान ।
जेबों में मक्कारियाँ ,कर देती हैरान ।।


सूरत धोखा दे रही,संबंधों में खोट ।
रिश्तों में चालाकियाँ ,देती गहरी चोट ।।


पाहुन सावन की तरह,भूले अपना देश ।
मेघ-डाकिया बाँटता ,नित झूठे सन्देश ।।

13 जुलाई 2012

वर्षा गीत !

वर्षा की रिमझिम बूंदों ने 
मन में नई मिठास भरी,
नए-नए पौधों से सजकर 
सारी धरती हुई हरी ||


सूरज की कठिन चुभन से
तन जब अग्नि समान हुआ,
मेघ-देव से जल-प्रसाद पा 
शीतल,शांत महान हुआ ||


झड़ी लगी जब वर्षा की 
लबालब्ब सब खेत हुए,
कृषकों के नाचे मन-मयूर 
मुदित सभी के हृदय हुए ||


वर्षा-देवी के स्वागत में
सूरज ने गरमी रोकी ,
पशु-पक्षी सारे चहक उठे
आई बहार भी फूलों की ||


हे वर्षा-देवी ! स्वागत-स्वागत 
सूखी धरती पर बार-बार,
तुम आईं ,जीवन आया 
संग में आईं खुशियाँ हज़ार ||




विशेष : रचनाकाल --१८/०६/१९९० 
स्थान: दल्ली-राजहरा (छत्तीसगढ़)

10 जुलाई 2012

उनका जन्मदिन,मेरा उपहार !



आठ दिन पहले श्रीमती जी का जन्मदिन था.अचानक मुझे याद आया कि यही सही वक्त है जब अपनी बहुत दिनों की एक मुराद पूरी कर ली जाए.दरअसल एक अच्छे कैमरे के लिए मैं काफ़ी दिन से सोच रहा था.सतीश सक्सेना जी से मुलाक़ात के बाद यह तलब और बढ़ गई.उन्होंने जिस अंदाज़ में हमारी ताबड़तोड़ शूटिंग की थी,मैं बिलकुल हैरान और मन्त्र-मुग्ध हो गया था.उनके पास निकोन का बहुत अच्छी क्वालिटी का डी एस एल आर है,मॉडल वही बताएँगे.इसके पहले प्रवीण त्रिवेदी जी और निशांत मिश्र जी के कैमरा-प्रेम को देख चुका था.

कैमरा लेने से पहले मैंने प्रवीण जी और निशांत जी से कई दौर की बात की.इन दोनों लोगों की सलाह काफ़ी उपयोगी लगी.मुझे कैमरे के तकनीकी-पक्ष की कोई जानकारी नहीं थी,अब भी न के बराबर है.हमने अपना बजट बीस हज़ार रूपये के आस-पास बनाया हुआ था.इससे ज़्यादा बजट भी नहीं था और ज़रूरत भी नहीं.निकोन,सोनी,कैनन को देखते-परखते अंततः पैनासोनिक के  FZ 47 को पसंद कर लिया.इसकी अधिकतम कीमत २०९९० रुपये थी और जान-पहचान का हवाला देकर यह मुझे १८५२० रुपये में पड़ा.हालाँकि बाद में प्रवीण जी ने जानकारी दी कि फ्लिपकार्ट वाले इसे १७६०० रूपये में दे रहे हैं.बाद में मैंने चेक किया तो सुलेखा डॉट कॉम में १७२२० रूपये में इसे उपलब्ध बताया जा रहा था.


बहरहाल ,इसे लेकर घर आए तो श्रीमती जी ने सारा दोष हमारे शौक पर मढ  दिया.उन्होंने इतना महंगा और उल-जलूल उपहार लेने से साफ़ इनकार कर दिया.मैंने भी मन में सोचा कि कौन-सा उनके लिए लाया हूँ.खैर.अब उसके फीचर देख लीजिए और कुछ प्रदर्शन भी !साथ ही,जो अनुभवी लोग हैं,उनसे गुज़ारिश है कि वे ज़रूरी टिप्स भी दे दें !


Basic Specifications
Resolution:12.10 Megapixels
Lens:24.00x zoom
(25-600mm eq.)
Viewfinder:EVF / LCD
LCD Size:3.0 inch
ISO:100-1600
Shutter:60-1/2000
Max Aperture:2.8
Dimensions:4.7 x 3.1 x 3.6 in.
(120 x 80 x 92 mm)
Weight:18.3 oz (518 g)
includes batteries

विस्तार से इसका रिव्यू यहाँ देखें !

और अब कुछ दृश्य :



रसोई में नाराज श्रीमतीजी !



छतरपुर मंदिर के बाहर 


महिंद्रा XUV 500 के अंदर भतीजा 

भतीजी और भाभी 



7 जुलाई 2012

प्रणय-गीत


मेरे जीवन की प्रथम-किरण,
         मेरे अंतर की कविता हो,
हृदय अंध में डूब रहा ,
        प्रज्ज्वलित करो तुम सविता हो !


मम भाग्य-विधाता  तुम्हीं  हो,
       तुम बिन जीवन है पूर्ण नहीं,
मेरे अंतर-उद्गारों को ,
      साथी ! करना तुम चूर्ण नहीं !


प्रेरणा तुम्हीं हो कविता की,
      मेरे मानस की अमर-ज्योति,
सत्यता तुम्हारे सम्मुख है,
     नहीं तनिक भी अतिशयोक्ति !


मेरे जीवन की डोर तुम्हीं,
    अपने से अलग नहीं करना,
प्यार तुम्हीं से केवल है,
      अंतर्मन में मुझको रखना !!



पहली बार प्रकाशित :२२/१०/२०१०


विशेष :पहला गीत,रचना-काल-१०/०६/१९८७
 स्थान-फतेहपुर(उ.प्र.)


रीपोस्रिपोस्ट

3 जुलाई 2012

सूरज की साजिश !

बादल हमको दे दगा,चले गए उस ओर |
बिन बारिश दम सूखता,नहीं नाचते मोर || (१)


धरती झुलसे उमस से,प्यासे पंछी मौन |
दादुर दर्शन हैं कठिन,अब टर्राये कौन ? (२)


सूखा सावन आ गया,गोरी खड़ी उदास |
झूले खाली पड़े हैं,बिरवा बिना हुलास || (३)


काया पत्थर की हुई,नहीं बरसते नैन |
रूठे बादल-बालमा,सूने हैं दिन-रैन || (४)


खुल्लमखुल्ला कर दिया,मेघों ने ऐलान |
सूरज की साजिश यही,नहीं बचे इंसान || ५)


जामुन काले हो रहे,बचा न उनमें स्वाद |
आम बिना टपके गिरें,मीठापन बर्बाद || (६ )